“भोजशाला परिसर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ASI सर्वे पर हस्तक्षेप से इनकार किया, मुस्लिम पक्ष को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने की सलाह।“
नई दिल्ली। भोजशाला परिसर से जुड़े संवेदनशील विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए एएसआई सर्वे में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में सभी आपत्तियों और साक्ष्यों पर विचार अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया इनकार?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए शीर्ष अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। मुस्लिम पक्ष को अपनी आपत्तियां और मांगें हाईकोर्ट में रखने को कहा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है, जिसमें एएसआई द्वारा कराए जा रहे सर्वे, वीडियोग्राफी और साक्ष्यों की पारदर्शिता को लेकर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई है।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की थी कि एएसआई सर्वे की वीडियोग्राफी की कॉपी उन्हें उपलब्ध कराई जाए और सुनवाई से पहले उनकी आपत्तियों पर विचार किया जाए।
वीडियोग्राफी और साक्ष्यों पर विवाद
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि 11 मार्च को हुए एएसआई सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि यह उनके लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सुनवाई में इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया गया।
याचिका की वैधता पर सवाल
सोसायटी ने हिंदू पक्ष की ओर से दायर मूल याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि इसे सुनवाई योग्य नहीं माना जाना चाहिए।
अब आगे क्या?
इस मामले में अब 2 अप्रैल से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई शुरू होगी। सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद अब इस पूरे विवाद का केंद्र हाईकोर्ट की कार्यवाही ही होगी।
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