“इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी संपत्ति पर भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई, कहा- शांति भंग होने पर प्रशासन कार्रवाई के लिए स्वतंत्र।“
Namaz on Private Property: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि निजी संपत्ति की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी जगह पर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित कर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट का सख्त रुख
प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी गतिविधि से शांति भंग होने की आशंका होती है, तो प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बरेली निवासी एक याचिकाकर्ता से जुड़ा है, जिसने रमजान के दौरान अपनी निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने से रोक और पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी थी।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित स्थान पर प्रतिदिन 50 से अधिक लोग एकत्रित हो रहे थे, जिससे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा था।
याचिकाकर्ता का आश्वासन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में उक्त संपत्ति पर बड़ी संख्या में लोगों को नमाज के लिए एकत्रित नहीं किया जाएगा।
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कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यदि इस आश्वासन का उल्लंघन होता है और भीड़ जुटती है, तो जिला प्रशासन और पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।
अन्य निर्देश
अदालत ने इस मामले में जारी चालानों को वापस लेने और पूर्व में दिए गए अवमानना नोटिसों को भी निरस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ आदेशों में भी संशोधन किया गया।
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