“शादी का वादा करके बना रिश्ता टूटने पर अपराध नहीं माना जाएगा, जब तक शुरुआत में धोखाधड़ी का इरादा साबित न हो—कोर्ट का बड़ा फैसला।“
हैदराबाद। Telangana High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शादी के वादे के आधार पर बने रोमांटिक संबंध का बाद में टूट जाना अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में धोखाधड़ी तभी मानी जाएगी, जब यह साबित हो कि शुरुआत से ही धोखा देने की मंशा थी।
जस्टिस एन. तुकारामजी की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द कर दिया। मामला पेड्डापल्ली जिले के निवासी के. संतोष से जुड़ा था, जिन पर एक युवती ने शादी का वादा कर संबंध बनाने और बाद में मुकर जाने का आरोप लगाया था।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि किसी रिश्ते में दोनों पक्ष लंबे समय तक सहमति से जुड़े रहे हों और बाद में किसी कारण से विवाह नहीं हो पाता, तो इसे धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। इसे केवल वादा पूरा न कर पाने की स्थिति माना जाएगा।
कोर्ट ने अपने फैसले में Supreme Court of India के पूर्व निर्णयों—‘हृदय रंजन प्रसाद वर्मा बनाम बिहार राज्य’ और ‘प्रमोद सूर्यभान पवार बनाम महाराष्ट्र राज्य’—का भी हवाला दिया। इन मामलों में भी कहा गया था कि शादी का वादा टूटना तभी आपराधिक माना जाएगा, जब शुरुआत से ही धोखा देने का स्पष्ट इरादा हो।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने पांच वर्षों तक संबंध बनाए रखने के बाद शादी से इनकार कर दिया और पैसे देने की पेशकश की। हालांकि अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने शुरुआत से ही धोखाधड़ी की मंशा रखी थी।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज केस को निरस्त कर दिया।
यह फैसला ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है, जहां व्यक्तिगत संबंधों के टूटने को आपराधिक विवाद में बदल दिया जाता है।
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