बिजली व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन तेज, 21 मई तक चलेगा अभियान

उपभोक्ताओं और किसानों को बताए जाएंगे वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के दुष्प्रभाव, संघर्ष समिति ने तेज किया आंदोलन

जन-जागरण अभियान उत्तर प्रदेश: बिजली कर्मचारियों ने 15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशभर में अभियान चलाने का ऐलान किया है। इसमें उपभोक्ताओं और किसानों को बिजली व्यवस्था पर पड़ रहे असर से अवगत कराया जाएगा।

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले प्रदेशभर में 15 अप्रैल से 21 मई तक व्यापक “जन-जागरण अभियान” चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं और किसानों को बिजली व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों और उनके संभावित दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।

12 अप्रैल को लखनऊ में आयोजित संघर्ष समिति की केंद्रीय कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की नीतियों, खासकर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के कारण उत्पन्न हो रही समस्याओं को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

संघर्ष समिति के अनुसार, इन नीतियों से बिजली वितरण व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को यह समझने में कठिनाई हो रही है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए किस कार्यालय से संपर्क किया जाए, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अनुभवी संविदा कर्मियों की छंटनी के कारण मेंटेनेंस कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।

समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है, जबकि पश्चिमांचल और मध्यांचल में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई शहरों के साथ राजधानी लखनऊ, अयोध्या और बरेली में भी यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। ऐसे में जन-जागरण अभियान के माध्यम से न केवल कर्मचारियों की आवाज को मजबूत किया जाएगा, बल्कि उपभोक्ताओं और किसानों को संभावित बिजली संकट के प्रति भी सचेत किया जाएगा।

गौरतलब है कि निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन 502 दिन पूरे कर चुका है। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों और परियोजनाओं में सभाएं आयोजित कर कर्मचारियों से आंदोलन को और सशक्त बनाने का आह्वान किया गया।

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