“Mayawati on Women Reservation 2026: बसपा सुप्रीमो मायावती ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए दलित और OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग की। कांग्रेस पर भी साधा निशाना।“
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati ने महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने इस व्यवस्था में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं को अलग से आरक्षण दिया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए Mayawati ने कहा कि उनकी पार्टी पहले से ही महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग करती रही है, लेकिन वर्तमान में 33 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय भी एक सकारात्मक कदम है, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में कुछ सुधार जरूर होगा।
कांग्रेस पर तीखा हमला
इस मुद्दे पर Mayawati ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब उसने महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण लागू नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर सुधार की प्रक्रिया को धीमा करना चाहती है। बसपा इस तरह की राजनीति का विरोध करती है और स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण के पक्ष में खड़ी है।
दलित और OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा जरूरी
बसपा सुप्रीमो ने जोर देते हुए कहा कि सामान्य महिला आरक्षण के भीतर दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा, इसलिए उनके लिए अलग से कोटा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बिना सामाजिक संतुलन के यह आरक्षण अधूरा रहेगा और इसका पूरा लाभ समाज के सभी वर्गों तक नहीं पहुंच पाएगा।
आंबेडकर जयंती का जिक्र
इस दौरान Dr. Bhimrao Ambedkar की जयंती का जिक्र करते हुए Mayawati ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि आजकल विभिन्न राजनीतिक दल दलित वोट बैंक को साधने के लिए आंबेडकर के नाम और प्रतीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इसका वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।
राजनीतिक संदेश और रणनीति
Mayawati का यह बयान आने वाले चुनावों के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर समर्थन के साथ-साथ अलग कोटे की मांग उठाकर बसपा ने सामाजिक न्याय की राजनीति को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश की है।
महिला आरक्षण पर समर्थन के साथ संशोधन की मांग रखकर Mayawati ने स्पष्ट किया है कि बसपा केवल आरक्षण के पक्ष में ही नहीं, बल्कि उसके भीतर सामाजिक संतुलन सुनिश्चित करने की भी पैरवी कर रही है।
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