“Lucknow Cyber Awareness Program 2026: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम सेल ने सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, निवेश ठगी, UPI धोखाधड़ी, फिशिंग लिंक और सोशल मीडिया हैकिंग से बचाव के उपाय बताए। जानिए साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियम और हेल्पलाइन 1930 की जानकारी।“
लखनऊ। तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच आम नागरिकों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की साइबर क्राइम सेल ने बुधवार को सिविल डिफेंस संगठन के अधिकारियों और स्वयंसेवकों के लिए विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में साइबर अपराध के नए तरीकों, ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों और उनसे बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, कैसरबाग में आयोजित इस कार्यक्रम की पहल नोडल साइबर क्राइम एवं एडीसीपी क्राइम ब्रांच किरन यादव के निर्देशन में की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों ने भाग लिया और साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी से सावधान रहने की सलाह
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।
प्रतिभागियों को बताया गया कि भारत में किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल के माध्यम से “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय संबंधित एजेंसी से सत्यापन करना चाहिए और किसी भी हालत में पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए।

निवेश पर भारी मुनाफे का लालच बन रहा जाल
साइबर विशेषज्ञों ने निवेश ठगी (इन्वेस्टमेंट फ्रॉड) के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि ठग सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी निवेश योजनाओं का प्रचार कर लोगों को कम समय में अधिक लाभ का लालच देते हैं।
शुरुआत में मामूली लाभ दिखाकर विश्वास जीतने के बाद बड़ी रकम निवेश कराई जाती है और फिर ठगी को अंजाम दिया जाता है। विशेषज्ञों ने लोगों को किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी।

बैंक खाता और यूपीआई आईडी साझा करना पड़ सकता है महंगा
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कई लोग लालच या कमीशन के चक्कर में अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड अथवा यूपीआई आईडी दूसरों को उपयोग के लिए दे देते हैं। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में प्राप्त धनराशि को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति का बैंक खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होता है तो वह भी कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में अपने बैंकिंग संसाधन किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध नहीं कराने चाहिए।
अन्य साइबर अपराधों पर भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, ओटीपी फ्रॉड, क्यूआर कोड स्कैम, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और यूपीआई धोखाधड़ी जैसे मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों के भय, लालच और विश्वास का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए।
साइबर सुरक्षा के लिए दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव
- ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी और नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- किसी भी अज्ञात लिंक या क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।
- वीडियो कॉल पर स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या आरबीआई अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहें।
- कम समय में अधिक लाभ देने वाली योजनाओं से दूरी बनाए रखें।
- अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई आईडी या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें।
- सोशल मीडिया खातों में मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
- साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
जागरूक डिजिटल समाज बनाने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उत्तर दिया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताते हुए साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी को आम जनता तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवकों से अपील की गई कि वे अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें, ताकि एक सुरक्षित और सतर्क डिजिटल समाज का निर्माण किया जा सके।
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