“भारत में दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा खुलासा—CDSCO की मार्च रिपोर्ट में 168 दवाएं NSQ (घटिया गुणवत्ता) और एक नकली पाई गई। जानिए किन कैटेगरी की दवाएं शामिल और क्या है इसका असर।“
हाइलाइट्स:
- CDSCO ने मार्च में 168 दवाओं को घटिया गुणवत्ता का पाया
- एक दवा पूरी तरह नकली घोषित
- पहली तिमाही में कुल 576 दवाएं फेल
- आम इस्तेमाल की हार्ट और सांस की दवाएं भी शामिल
- जांच जारी, सख्त कार्रवाई की तैयारी
नई दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मार्च 2026 में 168 दवाओं को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) या घटिया गुणवत्ता वाला पाया है। इसके अलावा एक दवा को पूरी तरह नकली भी घोषित किया गया है।
CDSCO की यह कार्रवाई बाजार में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर महीने की जाने वाली नियमित निगरानी का हिस्सा है।
केंद्रीय और राज्य लैब्स में फेल हुए सैंपल
जारी रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय लैब्स में जांचे गए 48 दवा सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि राज्य स्तरीय ड्रग टेस्टिंग लैब्स में 120 सैंपल फेल पाए गए। बिहार से जुड़ा एक सैंपल नकली निकला, जिसे किसी अन्य कंपनी के ब्रांड नाम का दुरुपयोग कर बनाया गया था।
ड्रग रेगुलेटर के मुताबिक, इस मामले में जांच जारी है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
क्या होता है NSQ?
‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ का मतलब है कि दवा अपने निर्धारित गुणवत्ता मानकों—जैसे घुलनशीलता (dissolution), मात्रा (assay) या एकरूपता—पर खरी नहीं उतरती। हालांकि यह जरूरी नहीं कि पूरी कंपनी के सभी उत्पाद खराब हों, क्योंकि कई बार यह समस्या किसी विशेष बैच तक सीमित होती है।
तीन महीने में 576 दवाएं फेल
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में कुल 576 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो चुकी हैं।
- जनवरी: 214 दवाएं
- फरवरी: 194 दवाएं
- मार्च: 168 दवाएं
यह आंकड़े बताते हैं कि फार्मा सेक्टर में निगरानी लगातार सख्त की जा रही है।
आम इस्तेमाल वाली दवाएं भी शामिल
इस सूची में कई ऐसी दवाएं शामिल हैं जो रोजमर्रा के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। जैसे:
- Clopidogrel – दिल के मरीजों में खून के थक्के रोकने के लिए
- Terbutaline – अस्थमा और सांस की बीमारियों में
- Ambroxol और Bromhexine – बलगम को पतला करने के लिए
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं की गुणवत्ता में कमी सीधे इलाज के असर को प्रभावित कर सकती है, जिससे मरीजों की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है।
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