होर्मुज में मारे गए देवरिया के शिवानंद चौरसिया, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

Deoria Shivanand Chaurasia News: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज क्षेत्र में जहाज पर हुए हमले में देवरिया निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी, माता-पिता और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से सहायता तथा पार्थिव शरीर जल्द लाने की मांग की है।

देवरिया/गोरखपुर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में हुए जहाज हादसे में उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत की खबर ने पूरे जिले को गमगीन कर दिया है। जैसे ही परिवार को बेटे की मौत की सूचना मिली, घर में कोहराम मच गया। माता-पिता, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव के लोग भी इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं।

परिजन पिछले तीन दिनों से शिवानंद के पार्थिव शरीर के इंतजार में हैं। परिवार की सबसे बड़ी इच्छा है कि बेटे का शव जल्द से जल्द गांव पहुंचे ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके। इसी मांग को लेकर परिवार ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

छह महीने पहले रोजी-रोटी के लिए घर से निकले थे शिवानंद

देवरिया जिले के सुरौली थाना क्षेत्र के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया रोजगार के सिलसिले में जहाज पर कार्यरत थे। परिवार के अनुसार वह करीब छह महीने पहले घर से नौकरी पर गए थे। बेहतर भविष्य की उम्मीद में पिता ने कर्ज लेकर उन्हें प्रशिक्षण के लिए मुंबई भेजा था।

परिजनों ने बताया कि 9 जून को शिवानंद से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि उनका जहाज ओमान के पास समुद्री क्षेत्र में मौजूद है। इसके बाद अचानक मौत की खबर मिलने से परिवार सदमे में है।

पत्नी बोलीं- पूरे परिवार की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?

शिवानंद की पत्नी सुशीला देवी इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। उन्होंने कहा कि पति की मौत से केवल उनका ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार का सहारा छिन गया है।

रोते हुए उन्होंने कहा कि अब बच्चों का भविष्य, बुजुर्ग सास-ससुर की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि परिवार को आर्थिक सहायता और उचित सहयोग दिया जाए।

पिता की गुहार- बेटे का शव तो सौंप दीजिए

मृतक के पिता रामजी चौरसिया का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा। उन्होंने कहा कि जिस बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसकी अंतिम विदाई का अवसर भी मिल जाए, यही उनकी अंतिम इच्छा है।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “बेटा तो अब वापस नहीं आएगा, लेकिन उसका शव हमें मिल जाए ताकि हम उसका अंतिम संस्कार कर सकें।”

गांव में पसरा मातम, हर आंख नम

शिवानंद की मौत की खबर के बाद पूरे सुरौली गांव में शोक की लहर है। गांव के लोग लगातार उनके घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी में परिवार को कब न्याय और सहायता मिलेगी।

गांव के पूर्व प्रधान अजीत शाही सहित कई स्थानीय लोगों ने सरकार से मृतक परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग तेज

ग्रामीणों का कहना है कि परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य शिवानंद ही था। उनकी मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ सकता है। ऐसे में सरकार को विशेष सहायता पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

परिजनों ने भी मांग की है कि शिवानंद की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए, जिससे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता का भविष्य सुरक्षित हो सके।

सांसद-विधायक ने जताया शोक

क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। हालांकि अभी तक शव कब भारत पहुंचेगा, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यही कारण है कि परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

पूरे गांव की निगाहें एक खबर पर टिकीं

सुरौली गांव में इस समय हर किसी की नजर एक ही खबर पर टिकी है—शिवानंद का पार्थिव शरीर कब पहुंचेगा। परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग अंतिम दर्शन के इंतजार में हैं। घर के बाहर जुटी भीड़ और परिजनों की सिसकियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि एक बेटे, पति और पिता की असमय मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।

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