PDA की काट के लिए भाजपा की नई रणनीति: आंबेडकर, अहिल्याबाई और कल्याण सिंह के बहाने सपा पर साधेगी निशाना

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने सपा के PDA अभियान की काट के लिए नई रणनीति बनाई है। डॉ. आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर और कल्याण सिंह से जुड़े मुद्दों पर प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर सपा को घेरने की तैयारी है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान की काट के लिए नई राजनीतिक रणनीति तैयार की है। पार्टी अब पिछड़े और अनुसूचित समाज के महापुरुषों तथा श्रद्धेय नारियों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर सपा को घेरने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत डॉ. भीमराव आंबेडकर, राजमाता अहिल्याबाई होल्कर और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए प्रदेशभर में राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है।

चार सितंबर को 403 विधानसभा क्षेत्रों में अभियान

भाजपा की योजना के अनुसार, 4 सितंबर को प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में कार्यकर्ता सपा के पीडीए अभियान की आलोचना करते हुए पार्टी के पुराने फैसलों और नेताओं के बयानों को जनता के सामने रखने का प्रयास करेंगे। भाजपा इस दौरान सपा सरकार के कार्यकाल में हुए कुछ निर्णयों और पूर्व मंत्री आजम खान के बाबा साहब से जुड़े पुराने बयान का भी उल्लेख करेगी।

अहिल्याबाई होल्कर के नाम बदलने का मुद्दा उठाएगी भाजपा

भाजपा ने 13 अगस्त को राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर भी प्रदेशव्यापी कार्यक्रम तय किया है। पार्टी का आरोप है कि सपा सरकार के कार्यकाल में औरैया के बिधूना स्थित अहिल्याबाई होल्कर राजकीय महाविद्यालय का नाम बदला गया था। भाजपा इसे पिछड़े समाज के सम्मान से जोड़ते हुए जिलास्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी और सपा से जवाब मांगेगी।

कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर भी सपा को घेरेगी

21 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर भी भाजपा विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी। पार्टी सपा पर यह आरोप लगाएगी कि उसने कल्याण सिंह की अंत्येष्टि और पुण्यतिथि कार्यक्रमों से दूरी बनाकर पिछड़ा समाज की भावनाओं का सम्मान नहीं किया। भाजपा इस मुद्दे को लोध समुदाय सहित अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

2024 के अनुभव से सबक, 2027 की तैयारी

भाजपा का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने संविधान और सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाकर ओबीसी और दलित वर्ग के बीच प्रभावी राजनीतिक संदेश देने में सफलता हासिल की थी। पार्टी अब उसी रणनीति का जवाब सामाजिक और वैचारिक मुद्दों के माध्यम से देने की कोशिश कर रही है।

इसी रणनीति के तहत भाजपा ने हाल के दिनों में संगठन और सरकार दोनों में पिछड़े और दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर भी जोर दिया है। पार्टी का उद्देश्य इन वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना है।

सोशल इंजीनियरिंग पर भाजपा का फोकस

भाजपा का मानना है कि चुनाव केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि प्रभावी राजनीतिक नैरेटिव से भी प्रभावित होते हैं। इसी कारण पार्टी चुनाव से पहले सामाजिक प्रतीकों और महापुरुषों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देकर सपा के पीडीए अभियान की धार को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है।

ओबीसी मोर्चा ने क्या कहा

भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा कि पार्टी पिछड़े समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी। उनके अनुसार, प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से सपा सरकार के दौरान लिए गए कुछ फैसलों को जनता के सामने रखा जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button