“दिल्ली के कथित 650 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य खरीद घोटाले की जांच के बीच स्वास्थ्य विभाग ने डाटा असिस्टेंट सुमित सिंह को बर्खास्त कर दिया है, जबकि दो जूनियर असिस्टेंट को निलंबित किया गया है। दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद में अनियमितताओं की जांच जारी है।“
नई दिल्ली। दिल्ली के चर्चित 650 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य खरीद घोटाले की जांच के बीच स्वास्थ्य विभाग ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए डाटा असिस्टेंट सुमित सिंह की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इसके साथ ही विभाग ने दो जूनियर असिस्टेंट को भी निलंबित कर दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) से जुड़े मामलों और निजी सप्लायरों से कथित नजदीकी की जांच के दौरान की गई है।
जानकारी के अनुसार, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सुषमा जैन के निर्देश पर सुमित सिंह को विभाग की सभी फाइलें, आधिकारिक दस्तावेज, लैपटॉप, पहचान पत्र और अन्य सरकारी सामग्री तत्काल जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और सर्जिकल सामग्री की खरीद प्रक्रिया में उनकी भूमिका क्या थी और क्या निजी सप्लायरों के साथ किसी प्रकार का अनुचित संबंध था।
इसी मामले में दो जूनियर असिस्टेंट को भी निलंबित किया गया है। हालांकि विभाग ने जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि खरीद प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और फाइल मूवमेंट की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
इससे पहले भी केंद्रीय खरीद एजेंसी से जुड़े पांच फार्मासिस्ट और दो अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। वहीं पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है। जांच एजेंसियां दवा, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए हाल के दिनों में 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला भी किया गया है। मामले की जांच एंटी करप्शन ब्रांच, विजिलेंस और अन्य एजेंसियों द्वारा जारी है तथा आने वाले दिनों में और भी कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
क्या है 650 करोड़ का स्वास्थ्य खरीद घोटाला?
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय खरीद एजेंसी से जुड़े इस कथित घोटाले में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सर्जिकल सामान की खरीद में अनियमितताओं, टेंडर में हेरफेर और कीमतों में भारी बढ़ोतरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या कुछ निजी कंपनियों और अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए खरीद प्रक्रिया में बदलाव किए गए थे।
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