स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद: यूपी सरकार झुकी, उपभोक्ताओं से वसूला पैसा लौटाने की मांग

अखिलेश यादव व संजय सिंह ने उठाई मांग—वसूले गए बढ़े हुए बिल लौटाए जाएं

स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद: यूपी सरकार ने विरोध के बाद प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था खत्म की। विपक्ष ने उपभोक्ताओं से वसूले गए बढ़े बिजली बिल वापस करने की मांग उठाई।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम को विपक्षी दलों ने जनता के विरोध और आंदोलन की जीत करार दिया है।

Akhilesh Yadav ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रीपेड मीटर की “भ्रष्ट व्यवस्था” के खिलाफ व्यापक विरोध के चलते ही सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने मांग की कि इस व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं से वसूले गए बढ़े हुए बिजली बिल का समायोजन कर उन्हें वापस किया जाए।

उन्होंने कहा कि जनता पर जबरन बढ़ा हुआ आर्थिक बोझ डाला गया है, जिसे अब सरकार को लौटाना होगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो विपक्ष और जनता मिलकर फिर से आंदोलन करेंगे।

वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता Sanjay Singh ने भी इस फैसले को जनता के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर “स्मार्ट चीटर” बन गए थे, जिससे आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कई गुना बढ़ोतरी हो गई थी।

प्रदेश में बीते दिनों से इस व्यवस्था के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। 28 अप्रैल से शुरू हुए आंदोलन और 3 मई के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के बाद सरकार ने सोमवार को इस प्रणाली को समाप्त करने का फैसला लिया।

सरकार के निर्णय के अनुसार अब नए बिजली कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं होंगे और पहले से लगे मीटरों को भी पोस्टपेड प्रणाली में बदला जाएगा।

फिलहाल विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलती और वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस नहीं की जाती, तब तक यह मुद्दा राजनीतिक रूप से गर्म बना रहेगा।

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