खुदीराम टुडू कौन हैं: जंगलमहल के आदिवासी नेता बने बंगाल सरकार में मंत्री

आदिवासी नेता जिन्होंने रानीबांध सीट से जीतकर बंगाल कैबिनेट में बनाई जगह

पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार में खुदीराम टुडू ने मंत्री पद की शपथ ली। जानिए जंगलमहल के आदिवासी नेता से लेकर रानीबांध सीट से जीतकर मंत्री बनने तक उनकी पूरी राजनीतिक यात्रा।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी भाजपा सरकार में खुदीराम टुडू का नाम उन नेताओं में शामिल है जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए भव्य समारोह में उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की कैबिनेट में जगह पाई।

जंगलमहल के आदिवासी क्षेत्र से उभरता राजनीतिक चेहरा

खुदीराम टुडू पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र से आने वाले एक आदिवासी नेता हैं। यह इलाका लंबे समय से आदिवासी राजनीति और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र रहा है। उन्होंने इस बार बांकुरा जिले की रानीबांध विधानसभा क्षेत्र सीट से चुनाव लड़कर 52 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

उनकी जीत को भाजपा के लिए आदिवासी इलाकों में बढ़ती पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीति में साधारण पृष्ठभूमि से मंत्री पद तक

चुनावी हलफनामे के अनुसार खुदीराम टुडू एक ग्रेजुएट हैं और उनकी संपत्ति लगभग 23 लाख रुपये बताई गई है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जो उन्हें एक साफ छवि वाला नेता बनाता है।

राजनीतिक सफर में वे लंबे समय तक जमीनी स्तर पर संगठन से जुड़े रहे और बाद में भाजपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे।

भाजपा की रणनीति में आदिवासी प्रतिनिधित्व

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक को साधना हमेशा से अहम रहा है। खुदीराम टुडू की मंत्री पद पर नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषकर जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा ने हाल के वर्षों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। आदिवासी कल्याण, स्थानीय विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडा में रखा गया।

कैबिनेट में आदिवासी चेहरा बनकर उभरे

नई सरकार में खुदीराम टुडू को शामिल करके भाजपा ने यह संकेत दिया है कि वह आदिवासी समुदाय को सत्ता में प्रतिनिधित्व देने पर जोर दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी मौजूदगी सरकार और जंगलमहल क्षेत्र के बीच राजनीतिक और सामाजिक सेतु का काम कर सकती है।

राज्य की राजनीति में बढ़ा महत्व

खुदीराम टुडू जैसे नेताओं का कैबिनेट में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन को भी दर्शाता है।

भाजपा की इस नई सरकार में उनका शामिल होना आदिवासी समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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