पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, ध्वनि प्रदूषण रोकने के भी दिए कड़े निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पार्क, खेल मैदान और खुले स्थलों के दुरुपयोग पर जताई नाराजगी, सर्वे कर सूची तैयार करने का आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थलों के व्यावसायिक उपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने और रात 10 बजे के बाद तेज आवाज वाले आयोजनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

लखनऊ। Allahabad High Court Lucknow Bench ने शहरों में पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों के व्यावसायिक उपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसे स्थानों का इस्तेमाल केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही होना चाहिए।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि पार्कों और खुले स्थानों में व्यावसायिक गतिविधियां, आयोजन और अनियंत्रित भीड़-भाड़ पर्यावरण, पक्षियों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही हैं।

सभी जिलों में सर्वे कर सूची तैयार करने के आदेश

न्यायमूर्ति Rajan Roy और न्यायमूर्ति Manjive Shukla की पीठ ने आदेश दिया कि सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों का सर्वे कराएं।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी स्थानों को उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान एवं खुली जगह संरक्षण एवं विनियमन अधिनियम-1975 के तहत तैयार होने वाली सरकारी सूची में शामिल किया जाए, ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

जनेश्वर मिश्र पार्क को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई

यह आदेश धर्मपाल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर पारित किया गया। याचिका में लखनऊ स्थित Janeshwar Mishra Park सहित अन्य पार्कों में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा-6 के अनुसार सूचीबद्ध पार्कों का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। किसी भी अन्य उपयोग के लिए संबंधित प्राधिकरण की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

ध्वनि प्रदूषण पर भी सख्ती

हाईकोर्ट ने शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस, नगर निगम और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि रात 10 बजे के बाद तेज आवाज और तय सीमा से अधिक शोर पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

न्यायालय ने कहा कि तेज आवाज वाले कार्यक्रमों से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ता है, इसलिए ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।

सरकार और प्रशासन को कड़ा संदेश

कोर्ट के इस फैसले को सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी जिलों में पार्कों और खुले स्थानों की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसके आधार पर आगे की नीति तय की जाएगी।

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