चीन से लौटते ही ईरान पर सख्त हुए ट्रंप, फिर शुरू हो सकता है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी, होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे से लौटने के बाद ईरान युद्ध को लेकर तनाव बढ़ गया है। पेंटागन ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी समेत कई सैन्य विकल्प तैयार किए हैं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है।

नई दिल्ली। Donald Trump के चीन दौरे से लौटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर सकता है। इसी क्रम में पहले रोके गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को फिर से शुरू करने की संभावना जताई जा रही है।

The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के कई विकल्पों का मसौदा तैयार किया है। अप्रैल में संघर्षविराम लागू होने के बाद ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को रोक दिया गया था, लेकिन अब हालात दोबारा तनावपूर्ण हो गए हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

चीन से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अगर मुझे किसी प्रस्ताव की पहली लाइन पसंद नहीं आती तो मैं उसे फेंक देता हूं।” ट्रंप के इस बयान को अमेरिका के सख्त रुख के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, इजरायल और पश्चिम एशिया के कुछ क्षेत्रीय देश ऐसे समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दे। दरअसल, वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है और वहां जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने भी इस सप्ताह सांसदों से कहा कि अमेरिकी सेना के पास हालात बिगड़ने पर सैन्य कार्रवाई के विकल्प मौजूद हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पेंटागन ने ऐसे कई सैन्य परिदृश्य तैयार किए हैं जिनमें ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर बमबारी शामिल है।

एक अन्य विकल्प के तहत अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्स को ईरान की इस्फहान परमाणु सुविधा के आसपास तैनात करने की योजना भी बताई गई है। माना जा रहा है कि वहां अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भूमिगत सुरक्षित रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशन सैनिक भेजे थे।

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी माना है कि किसी भी जमीनी अभियान में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है और इसके लिए हजारों अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत पड़ेगी।

उधर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिए हैं कि वह किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि ईरानी सेना किसी भी आक्रमण का “मुंहतोड़ जवाब” देगी।

होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे संकट का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है। ईरान इस सामरिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने को लेकर अब भी सशर्त रुख अपनाए हुए है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और निगरानी बढ़ा दी है।

चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहे। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे।

वहीं Abbas Araghchi ने कहा कि ईरान कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसे वॉशिंगटन पर भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली वार्ताओं के बाद भी ईरान पर हवाई हमले किए गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में इस समय 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक, दो विमानवाहक पोत, कई विध्वंसक युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान ने अपनी अधिकांश मिसाइल लॉन्च सुविधाओं और भूमिगत सैन्य ढांचे तक दोबारा पहुंच हासिल कर ली है।

बताया जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट के किनारे स्थित ईरान की 33 मिसाइल साइटों में से 30 फिर से सक्रिय स्थिति में आ चुकी हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।

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