“उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार अवसरों को बढ़ाने पर जोर दे रही है।“
लखनऊ। योगी आदित्यनाथने प्रदेश में श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आर्थिक मजबूरी के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसी दिशा में सरकार ने बाल श्रमिक विद्या योजना को प्रदेश के सभी 75 जनपदों तक विस्तारित करने का निर्णय लिया है।
शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं और प्रस्तावों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में चलेगा विशेष अभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाल श्रम की समस्या अधिक है, वहां विशेष अभियान चलाए जाएं। ऐसे बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के साथ-साथ उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में शुरू की गई बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के साथ आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
अभी यह योजना 20 जिलों में संचालित है, लेकिन अब इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू किया जाएगा।
निजी क्षेत्र को भी जोड़ा जाएगा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निजी संस्थानों और उद्योगों के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि शिक्षा के साथ उन्हें भविष्य में बेहतर रोजगार के अवसर भी मिल सकें।
सेवामित्र व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सेवामित्र व्यवस्था को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए इसे और मजबूत करने पर जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
वर्तमान में इस पोर्टल पर—
- 1097 सेवा प्रदाता पंजीकृत हैं
- 5049 सेवामित्र जुड़े हुए हैं
- 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं
मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों में भी आवश्यकता अनुसार सेवामित्र व्यवस्था के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही।
श्रमिकों के लिए बनेंगे आधुनिक सुविधा केंद्र
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक शहरों में निर्माण श्रमिकों के लिए प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्र (लेबर अड्डों) को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ये केंद्र केवल श्रमिकों के जुटने की जगह नहीं बल्कि सहायता, सुविधा और मार्गदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किए जाएं। दूसरे क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।
कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास की सबसे बड़ी शक्ति हैं। सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों और युवाओं को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर रोजगार उपलब्ध कराना है।
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