“उत्तर प्रदेश में गन कल्चर और प्रभावशाली लोगों के शस्त्र लाइसेंस को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह और अब्बास अंसारी समेत कई लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि, शस्त्र लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा का ब्योरा मांगा है।“
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और प्रभावशाली व्यक्तियों को जारी शस्त्र लाइसेंसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रदेश सरकार से कई चर्चित बाहुबलियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, शस्त्र लाइसेंस और उन्हें मिली सरकारी सुरक्षा का पूरा ब्योरा तलब किया है। अदालत के इस कदम को प्रदेश में हथियार संस्कृति और लाइसेंस व्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जा रहा है।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में प्रदेश में जारी शस्त्र लाइसेंसों से जुड़े आंकड़े पेश किए गए, जिनके सामने आने के बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस
सरकार द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस समय कुल 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इसके अलावा विभिन्न श्रेणियों के 23,407 आवेदन लंबित हैं। हलफनामे में यह भी बताया गया कि 6062 ऐसे लाइसेंसधारी हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इसके अतिरिक्त प्रदेश के 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं। इन आंकड़ों पर अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच जरूरी है।
इन चर्चित बाहुबलियों की मांगी गई जानकारी
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संतकबीर नगर निवासी जयशंकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कई चर्चित नामों से संबंधित जानकारी मांगी है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- रघुराज प्रताप सिंह
- बृज भूषण शरण सिंह
- अब्बास अंसारी
- धनंजय सिंह
- सुशील सिंह
- विनीत सिंह
- अजय मरदह
- सुजीत सिंह बेलवा
- उपेंद्र सिंह गुड्डू
- उदय भान सिंह
अदालत ने इन व्यक्तियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, लाइसेंसी हथियारों की स्थिति और सरकारी सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।
लखनऊ जोन के प्रभावशाली नाम भी जांच के दायरे में
हाईकोर्ट ने लखनऊ जोन और कमिश्नरेट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की जानकारी भी तलब की है। इनमें खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंघाला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहिब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह और अन्य नाम शामिल बताए गए हैं।
सुरक्षा या दबदबा? कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि कई बाहुबली, माफिया और उनके करीबी रिश्तेदारों के पास एक से अधिक लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं। आशंका जताई गई कि कुछ लोग सुरक्षा जरूरतों के बजाय सामाजिक प्रभाव, दबदबा और शक्ति प्रदर्शन के उद्देश्य से हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कोर्ट अब यह भी जानना चाहती है कि गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बावजूद किन परिस्थितियों में ऐसे लोगों के शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए या उनका नवीनीकरण हुआ।
फर्जी लाइसेंस ट्रांसफर के मामले ने बढ़ाई चिंता
सुनवाई के दौरान एक पुराने मामले का भी जिक्र सामने आया, जिसमें आरोप था कि एक विधायक के रिश्तेदार ने नागालैंड से कथित तौर पर फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाया और बाद में उसे दूसरे पते पर स्थानांतरित कराया गया। ऐसे मामलों ने शस्त्र लाइसेंस प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
अगली सुनवाई में सामने आ सकते हैं बड़े खुलासे
हाईकोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बाहुबलियों, दागी लाइसेंसधारियों और सरकारी सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनका प्रदेश की शस्त्र नीति और गन कल्चर पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
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