चार दशक की सैन्य सेवा के बाद सीडीएस अनिल चौहान को विदाई, तीनों सेनाओं ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

कार्यकाल के अंतिम दिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले- मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक और शानदार रहा

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को समाप्त हो गया। तीनों सेनाओं ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। 40 वर्षों से अधिक की सैन्य सेवा के बाद उन्होंने अपने कार्यकाल को बेहद संतोषजनक और शानदार बताया।

नई दिल्ली। देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल शनिवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। चार दशकों से अधिक की सैन्य सेवा के बाद उन्होंने वर्दी को अलविदा कहा। इस अवसर पर नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक के लॉन में तीनों सेनाओं की ओर से उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारियों में शामिल रहे जनरल चौहान ने विदाई समारोह के दौरान अपने लंबे सैन्य जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल बेहद संतोषजनक और शानदार रहा। उन्होंने इस सम्मान के लिए भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) मुख्यालय का आभार भी व्यक्त किया।

तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर के साथ मिली विदाई

गार्ड ऑफ ऑनर समारोह के बाद जनरल चौहान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे, जहां उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

विदाई समारोह के दौरान उन्होंने कहा, “तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सेवानिवृत्त होना मेरे लिए गर्व की बात है। यह सम्मान मेरे सैन्य जीवन की सबसे महत्वपूर्ण स्मृतियों में से एक रहेगा। इसके साथ ही मैं अपने साथियों और सैन्य परिवार को औपचारिक रूप से विदाई दे रहा हूं।”

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भावुक हुए जनरल चौहान

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की यात्रा को याद करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि वर्दी में यह उनका अंतिम औपचारिक सैन्य कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके लिए बेहद भावनात्मक क्षण रहा।

उन्होंने कहा, “मैंने युद्ध स्मारक पर वर्दी में आखिरी बार पुष्पचक्र अर्पित किया है। यह उन वीर सैनिकों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके बाद मित्रों, परिजनों और शुभचिंतकों ने मेरा स्वागत किया, जो सैन्य जीवन से नागरिक जीवन की ओर मेरे परिवर्तन का प्रतीक है।”

सितंबर 2025 में मिला था सेवा विस्तार

जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल मूल रूप से पहले समाप्त होना था, लेकिन सितंबर 2025 में कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उन्हें सेवा विस्तार प्रदान किया था। इसके बाद वह 30 मई 2026 तक सीडीएस और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के पद पर बने रहे।

उनकी विदाई के साथ ही देश के सर्वोच्च सैन्य समन्वयक के पद पर उनका कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है।

1981 में सेना में हुए थे शामिल

जनरल चौहान ने वर्ष 1981 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने 40 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य, परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड संभालीं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक रणनीतिक निर्णयों में योगदान दिया। उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों के अनुभवी और दूरदर्शी सैन्य नेतृत्वकर्ताओं में गिना जाता है।

कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित

देश के प्रति उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल चौहान को कई प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया गया। इनमें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं।

सैन्य एकीकरण को दी नई दिशा

सीडीएस के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान जनरल चौहान ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और एकीकृत सैन्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए कई सुधारात्मक पहल को आगे बढ़ाया।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके कार्यकाल में संयुक्त सैन्य कमान और थिएटराइजेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रगति हुई, जिसने भविष्य की सैन्य रणनीति को नई दिशा देने में मदद की।

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