“सर्वदलीय बैठक में TMC के 20 बागी सांसदों की एंट्री पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। कांग्रेस, सपा, DMK समेत कई दलों ने NCPI को मान्यता न मिलने के बावजूद बैठक में बुलाने पर सवाल उठाए। जानिए पूरा विवाद।“
नई दिल्ली। सर्वदलीय बैठक में TMC के 20 बागी सांसदों की एंट्री रविवार को संसद के मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक विवाद बन गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) बनाने वाले 20 सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झामुमो, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सांकेतिक वॉकआउट किया।
हालांकि विरोध दर्ज कराने के कुछ समय बाद सभी विपक्षी दल दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
क्यों हुआ विवाद?
पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का दावा किया था। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता की मांग भी की है, लेकिन इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
इसके बावजूद संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से उन्हें सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किए जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
विपक्ष ने पूछा- किस आधार पर बुलाया?
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि संसद के रिकॉर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर ये सांसद अभी भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य हैं। ऐसे में गैर-मान्यता प्राप्त दल को सर्वदलीय बैठक में बुलाने का आधार क्या है?
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए और जब तक लोकसभा अध्यक्ष किसी नए संसदीय दल को मान्यता नहीं देते, तब तक उसे अलग पहचान देना उचित नहीं है।
महुआ मोइत्रा ने सरकार पर साधा निशाना
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया क्योंकि एनसीपीआई को अभी तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष 20 सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें अलग दल मानते हुए सर्वदलीय बैठक में बुला लिया, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है।
महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि जब संसद के टेबल ऑफिस के रिकॉर्ड में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद दर्ज हैं, तब अलग ब्लॉक के रूप में 20 सांसदों को कैसे आमंत्रित किया गया?
विपक्ष ने किया सांकेतिक वॉकआउट
इस मुद्दे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झामुमो, नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट पार्टियों और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई विपक्षी दलों ने बैठक से सांकेतिक वॉकआउट किया। हालांकि कुछ देर बाद सभी दल दोबारा बैठक में शामिल हो गए और मानसून सत्र के एजेंडे पर चर्चा हुई।
NCPI ने सरकार का जताया आभार
दूसरी ओर, एनसीपीआई ब्लॉक की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का अवसर देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संसद की कार्यवाही में सकारात्मक भूमिका निभाएगी।
क्या कहता है संसदीय नियम?
लोकसभा में किसी नए संसदीय दल या समूह को अलग पहचान मिलने के लिए लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी आवश्यक होती है। जब तक अध्यक्ष औपचारिक मान्यता नहीं देते, तब तक संबंधित सांसदों की मूल पार्टी की सदस्यता और संसदीय स्थिति रिकॉर्ड में बनी रहती है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
मानसून सत्र पर क्या रहेगा असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र के पहले ही दिन विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठा सकता है। इसके अलावा कई अन्य राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
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