“KGMU लखनऊ में HRF स्टोर से जुड़ी करीब 5 लाख रुपये की दवाएं बाहर फेंकी हुई मिलीं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच समिति गठित कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।“
लखनऊ। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में दवाओं के रखरखाव और प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल के हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) स्टोर से जुड़ी करीब पांच लाख रुपये मूल्य की दवाएं परिसर के बाहर फेंकी हुई मिलीं। मामला सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने जांच के आदेश देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, एचआरएफ स्टोर का उद्देश्य मरीजों को बाजार की तुलना में कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन दवाओं के रखरखाव, भंडारण और निगरानी में कथित लापरवाही के चलते बड़ी मात्रा में दवाएं उपयोग से पहले ही खराब हो गईं। बाद में इन्हें परिसर के बाहर फेंक दिया गया, जिससे सरकारी धन की बर्बादी का मामला सामने आया है।
पहले भी विवादों में रहा है HRF सिस्टम
केजीएमयू का एचआरएफ सिस्टम पूर्व में भी कई बार सवालों के घेरे में रहा है। पूर्व की रिपोर्टों में वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान एचआरएफ और लोकल परचेज फंड के माध्यम से करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद का मामला सामने आया था। आरोप लगे थे कि दवाओं की गुणवत्ता जांच किए बिना सप्लाई करने वाली कंपनियों को भुगतान कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। वहीं, मरीजों और तीमारदारों की ओर से भी एचआरएफ व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज कराई जाती रही हैं।
मरीजों की शिकायतें भी बनीं चिंता का कारण
मरीजों का आरोप रहा है कि एचआरएफ काउंटर पर उपलब्ध दवाएं कई बार चिकित्सकों द्वारा पर्चे पर नहीं लिखी जातीं, जबकि वही दवाएं बाहर निजी मेडिकल स्टोरों से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती हैं। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब दवा वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की कवायद शुरू की गई है।
डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन का होगा ऑडिट
केजीएमयू प्रशासन ने चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही दवाओं की समीक्षा के लिए प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट शुरू किया है। इसके साथ ही एचआरएफ सिस्टम को पूरी तरह ऑनलाइन करने की तैयारी की जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत डॉक्टरों के कंप्यूटर स्क्रीन पर एचआरएफ स्टोर में उपलब्ध दवाओं की सूची दिखाई देगी। चिकित्सक उसी सूची से दवा का चयन कर मरीज को लिख सकेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध होंगी और दवा खरीद में पारदर्शिता बढ़ेगी।
जांच समिति करेगी जिम्मेदारी तय
पांच लाख रुपये की दवाएं बाहर फेंके जाने के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है। समिति यह पता लगाएगी कि दवाएं किस कारण खराब हुईं, उन्हें समय रहते उपयोग में क्यों नहीं लाया गया और निगरानी में चूक किस स्तर पर हुई।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दस दिन में लागू हो सकती है नई व्यवस्था
अधिकारियों के मुताबिक, एचआरएफ सिस्टम को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए नया सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। अगले दस दिनों में इसे लागू करने की तैयारी है। इसके बाद ओपीडी में कंप्यूटर आधारित दवा चयन प्रणाली शुरू होगी, जिससे मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की जानकारी सीधे मिल सकेगी।
फिलहाल इस मामले को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की बर्बादी और अव्यवस्था सीधे तौर पर मरीजों के हितों को प्रभावित करती है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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