जोजिला टनल में ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू: कश्मीर-लद्दाख की दूरी होगी कम, 15 मिनट में तय होगा डेढ़ घंटे का सफर

एशिया की सबसे बड़ी सड़क सुरंग निर्माण के अंतिम चरण में पहुंची, सालभर बना रहेगा कश्मीर-लद्दाख संपर्क; रक्षा, पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ

“Zojila Tunnel में ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू ब्लास्ट सफल हो गया है। कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने वाली 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग बनने के बाद एक घंटे से अधिक का सफर मात्र 15 मिनट में पूरा होगा और सालभर सड़क संपर्क बना रहेगा।“

जम्मू। भारत के बुनियादी ढांचा विकास के इतिहास में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई, जब सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जोजिला टनल में बहुप्रतीक्षित ब्रेकथ्रू ब्लास्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके साथ ही सुरंग के दोनों छोर आपस में जुड़ गए हैं और परियोजना अब निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गई है।

कश्मीर घाटी और लद्दाख को वर्षभर जोड़ने वाली यह सुरंग देश की सबसे महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसके शुरू होने के बाद भारी बर्फबारी के कारण महीनों तक बंद रहने वाले मार्ग पर भी आवागमन निर्बाध बना रहेगा।

छह महीने पहले हासिल हुई बड़ी सफलता

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सुरंग में ब्रेकथ्रू का कार्य निर्धारित समय से लगभग छह महीने पहले पूरा हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

अधिकारियों का अनुमान है कि सुरंग में शेष सिविल और तकनीकी कार्य पूरे होने के बाद इसे वर्ष 2028 की शुरुआत तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

क्या है जोजिला टनल की खासियत?

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जोजिला टनल दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित लंबी द्वि-दिशात्मक सिंगल-ट्यूब सड़क सुरंगों में से एक है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं—

  • समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर स्थित
  • मुख्य सुरंग की लंबाई लगभग 13.15 किलोमीटर
  • कुल परियोजना लंबाई लगभग 31 किलोमीटर
  • 18 किलोमीटर एप्रोच रोड और पुल भी शामिल
  • दो लेन यातायात की सुविधा
  • 9.5 मीटर चौड़ाई और 7.57 मीटर ऊंचाई
  • घोड़े की नाल (हॉर्स-शू) आकार की संरचना
  • अत्याधुनिक सुरक्षा और निगरानी प्रणाली

डेढ़ घंटे का सफर अब 15 मिनट में

वर्तमान में श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जोजिला दर्रा सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कई महीनों तक बंद रहता है। इस दौरान लद्दाख का सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है।

टनल चालू होने के बाद जोजिला दर्रे को पार करने में लगने वाला एक से डेढ़ घंटे का समय घटकर मात्र 15 मिनट रह जाएगा। इससे यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि अधिक सुरक्षित भी बनेगी।

कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर संपर्क

यह सुरंग कश्मीर के बालटाल को लद्दाख के मिनीमार्ग से जोड़ेगी। अभी भारी हिमपात के कारण यह मार्ग वर्ष में कई महीनों तक बंद रहता है।

टनल के संचालन के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच 365 दिन सड़क संपर्क बना रहेगा, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

अत्याधुनिक तकनीक से तैयार हो रही सुरंग

परियोजना का निर्माण मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। सुरंग को न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक से विकसित किया गया है।

इसमें कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें शामिल हैं—

  • सेमी-ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम
  • हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी निगरानी
  • आपातकालीन संचार प्रणाली
  • रेडियो कम्युनिकेशन नेटवर्क
  • निर्बाध विद्युत आपूर्ति
  • स्मार्ट एससीएडीए प्रबंधन प्रणाली
  • अग्नि एवं आपदा सुरक्षा तंत्र

सेना के लिए भी बनेगी लाइफलाइन

जोजिला टनल केवल नागरिक परिवहन परियोजना नहीं है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके शुरू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की त्वरित तैनाती, हथियारों और रसद सामग्री की आपूर्ति तथा आपातकालीन सैन्य संचालन को मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान से लगने वाले संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को भी लाभ मिलेगा।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

टनल के संचालन के बाद लद्दाख और कारगिल क्षेत्र में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वर्षभर सड़क संपर्क उपलब्ध रहने से होटल, परिवहन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

स्थानीय लोगों का मानना है कि जोजिला टनल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होगी और कश्मीर से लेकर लद्दाख तक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।

भारत की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक

जोजिला टनल को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वाकांक्षी इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जा रहा है। हिमालय की कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और अत्यधिक ऊंचाई पर इसका निर्माण भारतीय इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों की तकनीकी क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद यह न केवल कश्मीर और लद्दाख को स्थायी रूप से जोड़ेगी, बल्कि भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

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