“Flight Ticket Price Hike: सरकार की नई ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम के बीच जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 10 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इससे घरेलू एयरलाइंस की लागत बढ़ सकती है और आने वाले समय में हवाई टिकट महंगे होने की आशंका है। जानिए पूरी खबर।“
नई दिल्ली। पेट्रोल और रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों के बाद अब हवाई यात्रियों पर भी महंगाई का असर पड़ सकता है। सरकार की नई मूल्य स्थिरीकरण योजना (प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम) और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत वृद्धि के बाद घरेलू उड़ानों के किराए में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
सरकार ने घरेलू एयरलाइंस को तीन वर्ष तक एटीएफ की कीमतें तय करने का विकल्प दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस को अब 115 रुपये प्रति लीटर की निर्धारित दर से जेट फ्यूल खरीदना होगा। इससे पहले यह कीमत 104.92 रुपये प्रति लीटर थी।
एयरलाइंस के लिए वैकल्पिक होगी योजना
नई मूल्य स्थिरीकरण योजना पूरी तरह स्वैच्छिक रखी गई है। एयरलाइंस अपने व्यावसायिक हितों के अनुसार तय कर सकेंगी कि उन्हें इस योजना का हिस्सा बनना है या नहीं।
योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस को अगले तीन वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी। वहीं, जो एयरलाइंस इस व्यवस्था से बाहर रहेंगी, उन्हें बाजार आधारित दरों पर ही एटीएफ खरीदना होगा। वर्तमान में यह दर लगभग 142 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है।
क्या है नया फिक्स्ड प्राइसिंग मॉडल
सरकार द्वारा तैयार किया गया फिक्स्ड प्राइसिंग फॉर्मूला 86.32 रुपये प्रति लीटर के ‘फ्री-ऑन-बोर्ड’ (एफओबी) बेंचमार्क पर आधारित है। इसमें एयरपोर्ट शुल्क, तेल कंपनियों का मार्जिन और विभिन्न कर शामिल हैं।
इस फॉर्मूले के तहत दिल्ली में एटीएफ की प्रभावी कीमत 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.50 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 139 रुपये प्रति लीटर निर्धारित होगी। इससे एयरलाइंस को लागत का अनुमान लगाने और वित्तीय योजना बनाने में मदद मिलेगी।
वैश्विक संकट से बढ़ा दबाव
इस वर्ष पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल एवं विमानन ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है। इसके बावजूद देश में दो महीने से अधिक समय तक घरेलू एटीएफ की कीमतें लगभग 105 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर स्थिर रखी गई थीं।
सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया, जिससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा।
10,000 करोड़ रुपये के फ्रेमवर्क को मंजूरी
बढ़ती लागत और बाजार में अस्थिरता से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के मूल्य स्थिरीकरण फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के तहत यदि वैश्विक बेंचमार्क कीमतें निर्धारित आधार दर से ऊपर जाती हैं तो सरकार तेल कंपनियों को बिना ब्याज के अग्रिम सहायता उपलब्ध कराएगी।
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटेंगी, तब अतिरिक्त वसूली गई राशि को समायोजित कर भारत के समेकित कोष में वापस जमा किया जाएगा।
यात्रियों पर पड़ सकता है असर
विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि एटीएफ एयरलाइंस की परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा होता है। ऐसे में ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर आने वाले समय में हवाई किरायों पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति, यात्रियों की मांग और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो घरेलू उड़ानों के टिकट महंगे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”









