UP Railway News: उत्तर प्रदेश के 29 रेलवे स्टेशनों पर ‘One Station One Product (OSOP)’ योजना का विस्तार किया गया है। प्रयागराज मंडल के 24 प्रमुख स्टेशनों पर स्थानीय हस्तशिल्प, ODOP उत्पाद, मूंज की डलिया, कालीन, चमड़ा उत्पाद, ताले और अन्य पारंपरिक वस्तुएं यात्रियों को उपलब्ध होंगी। इस पहल से स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों को रोजगार और बड़ा बाजार मिलेगा।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के रेलवे स्टेशनों पर अब सिर्फ ट्रेन का इंतजार ही नहीं होगा, बल्कि यात्रियों को स्थानीय संस्कृति, कला और पारंपरिक उत्पादों की झलक भी देखने को मिलेगी। उत्तर मध्य रेलवे ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ (ओएसओपी) योजना का बड़ा विस्तार करते हुए प्रयागराज मंडल के 24 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय हस्तशिल्प और ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि उनके उत्पाद देशभर के यात्रियों तक पहुंच सकें और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
प्लेटफॉर्म पर दिखेगी स्थानीय पहचान
योजना के तहत प्रत्येक स्टेशन पर उस जिले की विशिष्ट पहचान से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। प्रयागराज जंक्शन और छिवकी स्टेशन पर यात्रियों को प्रसिद्ध मूंज की कलात्मक डलियां मिलेंगी। मीरजापुर और विंध्याचल स्टेशनों पर विश्व प्रसिद्ध कालीन और दरी उपलब्ध होगी। कानपुर सेंट्रल पर चमड़े के उत्पाद, अलीगढ़ में ताले, हाथरस में हींग, मैनपुरी में तारकशी कला तथा खुर्जा स्टेशन पर चीनी मिट्टी के बर्तन यात्रियों को आकर्षित करेंगे।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे यात्रियों को बिना शहर के बाजारों में गए स्थानीय उत्पाद खरीदने की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय कला को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मिलेगा बल
केंद्र सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत शुरू की गई यह योजना स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि देशभर में रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही वाले स्टेशन स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए सबसे उपयुक्त मंच साबित हो सकते हैं।
इन 24 स्टेशनों पर लगेंगे स्टॉल
प्रयागराज मंडल के जिन प्रमुख स्टेशनों को इस योजना के लिए चुना गया है उनमें सोनभद्र, मीरजापुर, विंध्याचल, चुनार, मानिकपुर, प्रयागराज-छिवकी, फतेहपुर, कानपुर सेंट्रल, पनकीधाम, कानपुर अनवरगंज, फफूंद, मैनपुरी, हाथरस, अलीगढ़, भोगांव, अचल्दा, झिंझक, रूरा, भरथना, दादरी, डावर, इटावा, खुर्जा और शिकोहाबाद शामिल हैं।
इन स्टेशनों पर विशेष स्टॉल, कियोस्क और ट्रालियों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री की जाएगी।
आसान होगी आवेदन प्रक्रिया
रेलवे प्रशासन ने योजना में भागीदारी के लिए नियमों को बेहद सरल रखा है। रेलवे अपने खर्च पर स्टॉल और ट्रालियां तैयार कर पात्र कारीगरों को उपलब्ध कराएगा। स्टॉल आवंटन की अवधि न्यूनतम 15 दिन और अधिकतम तीन माह निर्धारित की गई है।
15 दिनों के लिए पंजीकरण शुल्क 500 से 1000 रुपये तथा तीन माह के लिए 3000 से 6000 रुपये रखा गया है, ताकि छोटे और सीमित संसाधनों वाले कारीगर भी आसानी से इस योजना का लाभ उठा सकें।
रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा
योजना के तहत प्रत्येक स्टॉल पर दो सेल्समैन नियुक्त करने की अनुमति होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हस्तशिल्प, हैंडलूम, पारंपरिक वस्त्र, मिट्टी के बर्तन, कृषि उत्पाद और खाद्य सामग्री की बिक्री की जा सकेगी। खाद्य उत्पाद बेचने वालों के लिए वैध एफएसएसएआई लाइसेंस अनिवार्य होगा।
कमजोर वर्गों को मिलेगी प्राथमिकता
रेलवे प्रशासन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों, स्वयं सहायता समूहों और पंजीकृत कारीगरों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। ट्राइफेड, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग तथा विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) से जुड़े कारीगरों को चयन प्रक्रिया में विशेष वरीयता दी जाएगी।
इच्छुक आवेदक 15 जून 2026 तक संबंधित स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह योजना केवल व्यापारिक गतिविधि नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने का माध्यम भी है। जब यात्रियों को स्टेशन पर ही किसी क्षेत्र की पहचान से जुड़े उत्पाद मिलेंगे, तो इससे स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
रेलवे के अनुसार, 15 जून के बाद इन स्टेशनों पर स्टॉल संचालन शुरू होने के साथ ही प्लेटफॉर्म केवल यात्रियों के आवागमन का केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि स्थानीय हुनर और भारतीय संस्कृति की जीवंत प्रदर्शनी के रूप में भी नजर आएंगे।
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