आगरा में दो दिन में उखड़ गई नई सड़क, भाजपा पार्षद ने PWD पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

Agra Road Construction News: आगरा के मुस्तफा क्वार्टर क्षेत्र में PWD द्वारा बनाई गई सड़क दो दिन के भीतर उखड़ गई। स्थानीय लोगों और भाजपा पार्षद राकेश कन्नौजिया ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की।

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम के वार्ड-36 स्थित मुस्तफा क्वार्टर इलाके में हाल ही में बनाई गई सड़क निर्माण के महज दो दिन बाद ही उखड़ने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। परिणामस्वरूप सड़क निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद उसकी सतह टूटने और उखड़ने लगी।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितता हुई है और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।

भाजपा पार्षद ने पहले भी किया था विरोध

वार्ड के भाजपा पार्षद राकेश कन्नौजिया ने इस मामले को पहले भी उठाया था। उन्होंने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर PWD कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने सड़क को दोबारा बनाने और गुणवत्ता सुधारने का आश्वासन दिया था।

पार्षद के अनुसार, शिकायत के बाद PWD के जूनियर इंजीनियर श्रीकृष्ण ने सड़क को दोबारा बनाने का भरोसा दिया था।

मरम्मत के नाम पर औपचारिकता का आरोप

स्थानीय लोगों और पार्षद का आरोप है कि शुक्रवार रात विभाग की ओर से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में थोड़ी मात्रा में गिट्टी लाकर सड़क पर डालने का प्रयास किया गया, ताकि केवल औपचारिक रूप से मरम्मत दिखाकर मामले को समाप्त किया जा सके।

इस पर लोगों ने विरोध जताते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोक दिया और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण की मांग की।

लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक निर्धारित मानकों के अनुरूप सड़क निर्माण नहीं कराया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। लोगों ने विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

PWD की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो सार्वजनिक धन की बर्बादी और जनता की परेशानियां लगातार बढ़ती रहेंगी।

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