“लखनऊ स्थित केजीएमयू में जुलाई से हार्ट ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने जा रही है। अत्याधुनिक आईसीयू, प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम और आधुनिक उपकरणों से लैस यह सुविधा प्रदेश के हार्ट फेलियर मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगी“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। राजधानी स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में जुलाई 2026 से हार्ट ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। इस सुविधा के शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों और हार्ट फेलियर से जूझ रहे मरीजों को प्रदेश में ही बेहतर और सुलभ उपचार मिल सकेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, हृदय प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक चिकित्सा ढांचा, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, एडवांस आईसीयू और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पूरी तरह तैयार है। अब केवल उपयुक्त डोनर हार्ट मिलने का इंतजार है, जिसके बाद प्रत्यारोपण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने बताया कि संस्थान का कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस) विभाग इस पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगा। मरीजों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम, वेंटिलेटर और विश्वस्तरीय चिकित्सा उपकरण भी स्थापित किए गए हैं।
अब तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश गंभीर हृदय रोगियों को हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद या निजी कॉरपोरेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता था। केजीएमयू में यह सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को अपने ही प्रदेश में समय पर इलाज मिल सकेगा।
लारी कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ऋषि सेठी के अनुसार, ओपीडी में आने वाले लगभग 10 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिन पर दवाओं और सामान्य सर्जरी का असर नहीं होता। ऐसे मरीजों के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट ही अंतिम और प्रभावी विकल्प होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में प्रति दस लाख आबादी पर केवल 0.2 हार्ट ट्रांसप्लांट होते हैं, जबकि वैश्विक औसत 1.06 है। देश में होने वाले लगभग 65 प्रतिशत हृदय प्रत्यारोपण दक्षिण भारत के राज्यों में होते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में इस सुविधा का विस्तार चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सबसे बड़ी राहत इलाज की लागत को लेकर है। निजी अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट का खर्च 35 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि केजीएमयू में यह खर्च लगभग 8 से 10 लाख रुपये के बीच रहने का अनुमान है। इसके अलावा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मरीजों को आर्थिक सहायता मिलने की भी संभावना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ प्रदेश में हार्ट ट्रांसप्लांट की संख्या में वृद्धि होगी और गंभीर हृदय रोगियों को नया जीवन मिल सकेगा।
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