“लखनऊ के लोहिया संस्थान ने रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए किडनी कैंसर से पीड़ित मरीज के गुर्दे के साथ मुख्य नस और अन्य रक्त वाहिकाओं में फैले खून के थक्कों को सफलतापूर्वक निकाला। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में ऐसे मामले बेहद दुर्लभ हैं।“
लखनऊ। राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। संस्थान के यूरोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग ने एक ऐसे जटिल कैंसर मामले का सफल उपचार किया है, जिसे चिकित्सा जगत में दुनिया के सबसे दुर्लभ रोबोटिक ऑपरेशनों में गिना जा रहा है।
55 वर्षीय मरीज में किडनी कैंसर के कारण दाहिने गुर्दे में ट्यूमर विकसित हो गया था, जो शरीर की मुख्य रक्त वाहिका इन्फीरियर वेना कावा (IVC) तक फैल चुका था। इतना ही नहीं, खून का थक्का दिल से महज 3.5 सेंटीमीटर पहले तक पहुंच गया था, जबकि दूसरा थक्का गोनैडल वेन से होते हुए कमर की नसों तक फैल गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का संयोजन विश्व स्तर पर बेहद कम मामलों में देखने को मिला है।
रोबोटिक तकनीक से हुआ जटिल ऑपरेशन
यूरोलॉजी विभाग की टीम ने रोबोटिक तकनीक की मदद से कैंसरग्रस्त गुर्दे को निकालने के साथ-साथ मुख्य नस और अन्य रक्त वाहिकाओं में फैले खून के थक्कों को भी सफलतापूर्वक बाहर निकाला। विशेष बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बड़े चीरे वाले पारंपरिक ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ी।
सर्जरी के दौरान केवल लगभग 350 मिलीलीटर रक्तस्राव हुआ और मरीज को रक्त चढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। ऑपरेशन के बाद मरीज को आठ दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और दो सप्ताह बाद की जांच में उसकी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक पाई गई।
रोबोटिक सर्जरी में प्रदेश का अग्रणी केंद्र बना संस्थान
संस्थान में अब तक विभिन्न विभागों में कुल 490 रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। इनमें से 382 सर्जरी अकेले यूरोलॉजी विभाग द्वारा की गई हैं, जो कुल रोबोटिक ऑपरेशनों का लगभग 78 प्रतिशत है। यह उपलब्धि विभाग को संस्थान का सबसे अग्रणी रोबोटिक सर्जरी केंद्र बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के मरीजों का सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर भरोसा और मजबूत होगा।
सरकारी अस्पतालों की क्षमता का उदाहरण
संस्थान के निदेशक ने इस उपलब्धि को संस्थान की समर्पित चिकित्सा टीम और मरीज-केंद्रित कार्य संस्कृति का परिणाम बताते हुए कहा कि यह सफलता साबित करती है कि सरकारी अस्पताल भी आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के आधार पर देश के बड़े निजी अस्पतालों के बराबर चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
विभागाध्यक्ष के नेतृत्व में मिली नई पहचान
यूरोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में उन्नत शल्य तकनीकों, अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रकाशनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। विभाग ने अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं को आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचाने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया है।
विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग विभाग की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ऑपरेशन में सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने समन्वित प्रयासों से इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफल बनाया।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होगा मामला
संस्थान इस दुर्लभ चिकित्सा उपलब्धि और ऑपरेशन से जुड़े वैज्ञानिक निष्कर्षों को अंतरराष्ट्रीय यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजने की तैयारी कर रहा है, जिससे वैश्विक चिकित्सा समुदाय भी इस अनुभव से लाभान्वित हो सके।
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