“वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता कोर्ट की सुनवाई पूरी हो गई। मंदिर और मस्जिद पक्ष ने समझौते से इनकार करते हुए कहा कि अब अदालत का अंतिम फैसला ही सर्वमान्य होगा।“
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मामले में मध्यस्थता कोर्ट की प्रक्रिया पूरी हो गई है। मंगलवार को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों ने आपसी समझौते के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। दोनों पक्षों ने साफ किया कि वे अपनी-अपनी कानूनी दलीलों के आधार पर लड़ाई जारी रखेंगे और अदालत के अंतिम निर्णय को मानेंगे।
मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान चार पत्रावलियों से जुड़े पक्षकारों को बुलाया गया था। सभी पक्षों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस मामले में समझौते की संभावना नहीं है।
दोनों पक्ष अपने रुख पर कायम
मध्यस्थता कोर्ट में हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि एवं अधिवक्ता शामिल हुए। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने कहा कि वे किसी भी प्रकार के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।
मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन मसाजिद के प्रतिनिधि और अधिवक्ता भी मौजूद रहे। वहीं मंदिर पक्ष की ओर से अधिवक्ता रेखा पाठक, शैलेंद्र पाठक समेत अन्य लोग पहुंचे।
मंदिर पक्ष ने कहा- “हमें मंदिर चाहिए”
मंदिर पक्ष ने मध्यस्थता के दौरान अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ज्ञानवापी परिसर में मंदिर होने का उनका दावा कायम है और वे किसी समझौते के पक्ष में नहीं हैं।
अधिवक्ता शैलेंद्र पाठक ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर के तलगृह में पूजा जारी है और उनकी मांग मंदिर में पूजा-अर्चना के अधिकार से जुड़ी है।
मुस्लिम पक्ष भी समझौते के लिए तैयार नहीं
मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने से इनकार किया। उनका कहना है कि मामले का फैसला न्यायालय के माध्यम से ही होना चाहिए।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण मध्यस्थता प्रक्रिया किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।
क्या है ज्ञानवापी विवाद?
वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद लंबे समय से अदालत में चल रहा है।
हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी परिसर में आदि विश्वेश्वर मंदिर मौजूद था और ऐतिहासिक परिस्थितियों में मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया।
वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक धार्मिक स्थल है और यह वक्फ संपत्ति से जुड़ा मामला है।
पूजा स्थल अधिनियम 1991 का मुद्दा
ज्ञानवापी मामले में पूजा स्थल अधिनियम 1991 भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। मुस्लिम पक्ष इस कानून का हवाला देते हुए कहता है कि 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता।
वहीं मंदिर पक्ष का तर्क है कि यह मामला धार्मिक स्थल की पहचान और अधिकार से जुड़ा है।
ASI सर्वे और कानूनी लड़ाई
ज्ञानवापी परिसर को लेकर अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सर्वे कराया गया था। हिंदू पक्ष ने सर्वे में मंदिर से जुड़े अवशेष मिलने का दावा किया था।
फिलहाल यह मामला वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”








