रायबरेली के भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसद-विधायकों को चूड़ियां भेजीं

UGC के नए नियमों के विरोध में रायबरेली के भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसद-विधायकों को चूड़ियां भेजकर विरोध जताया। वहीं आगरा में भाजपा नेता जगदीश पचौरी ने प्रधानमंत्री मोदी को खून से पत्र लिखकर नियमों में त्रुटियों का आरोप लगाया। विरोध तेज़, जनरल कैटेगरी छात्र चिंतित।

हाइलाइट्स:

  • UGC नियमों का विरोध देशभर में बढ़ा
  • रायबरेली में भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसद-विधायकों को चूड़ियां भेजीं
  • आगरा में भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा
  • जनरल कैटेगरी छात्रों के खिलाफ नियमों को ‘काला कानून’ बताया
  • विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन की चेतावनी

रायबरेली। UGC Rules का विरोध तेजी से देशभर में फैल रहा है। रायबरेली में भाजपा नेताओं ने इस विरोध को नया मोड़ देते हुए सवर्ण सांसद-विधायकों को चूड़ियां भेजकर अपनी नाराजगी जताई है। इस घटना को राजनीतिक दलों और स्थानीय जनता ने गहराई से देखा जा रहा है।

रायबरेली के किसान नेता रमेश बहादुर सिंह ने कहा कि सवर्ण नेता भाजपा की नीतियों के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें चूड़ियां भेजकर विरोध दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि जनता ने इन्हें वोट देकर चुना है, लेकिन जब UGC नियमों के खिलाफ जनहित में विरोध शुरू हुआ तो ये नेता चुप्पी साधे बैठे हैं। ऐसे नेताओं को गृहिणी का काम करना चाहिए और महिलाओं को राजनीति करने का मौका देना चाहिए, ऐसा उन्होंने कड़ा बयान दिया।

गौ रक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने कहा कि “हमारा परिवार पहले है, पार्टी बाद में।” उन्होंने बताया कि वे 40 साल से भाजपा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि सवर्ण सांसद, विधायक और मंत्री यूजीसी नियमों पर बोल नहीं रहे हैं, इसलिए उन्हें चूड़ियां भेजी जा रही हैं।

पांडेय ने कहा कि UGC नियमों के कारण हमारे बच्चे इंटर के बाद पढ़ नहीं पाएंगे, और हम भाजपा का समर्थन करते रहेंगे, यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता सेनानियों की तरह रानी लक्ष्मीबाई और चंद्रशेखर आजाद ने कुर्बानी दी थी, आज के सवर्ण नेता यूजीसी नियम पर बोल नहीं रहे हैं। ऐसे नेताओं का वह खुला विरोध करेंगे और सड़कों पर भी प्रदर्शन करेंगे।

आगरा में भी विरोध की लहर बढ़ी है। भाजपा नेता और नगर निगम के पूर्व उपसभापति जगदीश पचौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पत्र लिखकर UGC नियमों में त्रुटियों का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि UGC नियमावली में तीन मुख्य त्रुटियां हैं:

  1. अरोप लगाकर किसी भी SC/ST/OBC छात्र को दोषी ठहराने की कोशिश की जा सकती है।
  2. कोर कमेटी में जनरल कैटेगरी छात्र की बात रखने का कोई अवसर नहीं।
  3. आरोप गलत पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं।

पचौरी का कहना है कि इस नियम से जनरल वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं की प्रतिभा रुक जाएगी, और यह उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे आत्महत्या जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

UGC Rules का विरोध अब सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसे सामाजिक और शैक्षिक विवाद के रूप में भी देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button