“सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का अनशन समाप्त करने के बाद कहा कि केंद्र सरकार से उनकी कोई डील नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि संभावित पुलिस कार्रवाई और छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया।“
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चले अपने आमरण अनशन को समाप्त करने के बाद पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार के साथ उनकी कोई डील या समझौता नहीं हुआ। उनका कहना है कि उन्होंने अनशन इसलिए समाप्त किया ताकि प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर संभावित पुलिस कार्रवाई तथा हिंसा की आशंका को टाला जा सके।
‘छात्रों की सुरक्षा मेरी पहली प्राथमिकता थी’
यूट्यूब पर जारी अपने वीडियो “Do I Need A Character Certificate From Anyone!” में वांगचुक ने कहा कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य आंदोलन में शामिल छात्रों को किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई और हिंसा से बचाना था।
उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका थी कि यदि स्थिति और बिगड़ी तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। इसी कारण उन्होंने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
‘अगर डील करनी होती तो 26 दिन भूखा क्यों रहता?’
सरकार से समझौते के आरोपों को खारिज करते हुए वांगचुक ने कहा कि यदि उन्हें समझौता ही करना होता तो वह 26 दिन तक भूखे रहने के बजाय पहले ही बातचीत कर सकते थे।
उन्होंने कहा कि बिना लिखित आश्वासन के उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया। उनका कहना था कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए।
‘लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही अनशन समाप्त किया’
वांगचुक के अनुसार, केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में शुरुआत में केवल मौखिक आश्वासन दिया गया था। उन्होंने इस पर सहमति नहीं जताई और लिखित आश्वासन की मांग की।
उनका दावा है कि देर रात लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपना 26 दिन का अनशन समाप्त किया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी रखी बात
वांगचुक ने कहा कि बातचीत के दौरान उनकी प्राथमिकता केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग नहीं थी। उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों के खिलाफ एफआईआर और अन्य कानूनी कार्रवाई रोकना था।
उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग आगे भी जारी रहेगी और आंदोलन अपने उद्देश्य की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अस्पताल में व्यवहार पर भी उठाए सवाल
वांगचुक ने आरोप लगाया कि विरोध स्थल से अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें सामान्य स्वतंत्रता नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि उनसे मिलने वालों पर रोक लगाई गई और संचार के साधनों के उपयोग में भी प्रतिबंध लगाए गए।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंदोलन जारी रखने का संकेत
वांगचुक ने कहा कि उनका अनशन समाप्त हुआ है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्रों के हितों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने आंदोलन में सहयोग देने वाले छात्रों, सामाजिक संगठनों और समर्थकों का भी आभार व्यक्त किया।
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