“वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान एक तीन मंजिला जर्जर इमारत महज 5 सेकंड में भरभराकर गिर गई। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। जानिए 215 करोड़ रुपये के दालमंडी प्रोजेक्ट, ध्वस्तीकरण अभियान और पूरे घटनाक्रम की पूरी जानकारी।“
वाराणसी। वाराणसी दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान रविवार सुबह एक तीन मंजिला जर्जर इमारत महज 5 सेकंड में भरभराकर ढह गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय क्षेत्र को पहले ही खाली करा लिया गया था, जिससे किसी भी तरह की जनहानि या चोट की सूचना नहीं है।
इमारत गिरने का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें भवन कुछ ही क्षणों में पूरी तरह मलबे में तब्दील होता दिखाई देता है।
दालमंडी में तेज़ी से चल रहा ध्वस्तीकरण अभियान
दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन की ओर से लगातार ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को 10 भवनों को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। बुलडोजर और पोकलैंड मशीनों की मदद से पुराने और जर्जर भवनों को गिराया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार अब तक 165 से अधिक भवनों को हटाया जा चुका है, जबकि केवल 6 भवनों पर कार्रवाई बाकी है। इसके अलावा चिन्हित छह धार्मिक स्थलों में से पांच को हटाया जा चुका है और संबंधित पक्षों को विभाग की ओर से क्षतिपूर्ति भी दी गई है।
विरोध करने वालों पर पुलिस की कार्रवाई
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान हाल ही में विरोध और हंगामे की घटनाएं भी सामने आई थीं। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विकास प्राधिकरण (VDA) की टीम का विरोध किया और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई।
इस मामले में पुलिस ने 6 लोगों को हिरासत में लिया, जबकि 6 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
215 करोड़ रुपये की दालमंडी परियोजना
दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना की अनुमानित लागत करीब 215 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत 181 भवनों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए गए हैं।
परियोजना के पूरा होने पर:
- लगभग 650 मीटर लंबी सड़क तैयार होगी।
- सड़क की कुल चौड़ाई 60 फीट होगी।
- इसमें 30 फीट मुख्य सड़क और दोनों ओर 15-15 फीट चौड़े फुटपाथ बनाए जाएंगे।
बाबा विश्वनाथ धाम तक आसान होगी पहुंच
इस परियोजना का उद्देश्य काशी विश्वनाथ धाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है। नई सड़क बनने से भीड़भाड़ कम होगी और श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।
इसके साथ ही दालमंडी क्षेत्र को टूरिस्ट कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना भी है। यहां बनारसी हथकरघा, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक बाजार विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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