“69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वर्तमान शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रखते हुए संशोधित मेरिट सूची के पात्र अभ्यर्थियों को रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जा सकती है। जानिए पूरी खबर, सुनवाई और विवाद का पूरा घटनाक्रम।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की उम्मीद एक बार फिर बढ़ गई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई से पहले प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित रखी जाएं और संशोधित मेरिट सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दे दी जाए। सरकार ने यह व्यवस्था केवल 69 हजार शिक्षक भर्ती तक सीमित रखने का आग्रह भी किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखा विस्तृत पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल लिखित जवाब में राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया से लेकर अब तक की पूरी घटनाक्रम का उल्लेख किया है। सरकार ने कहा कि एक दिसंबर 2018 के शासनादेश के तहत परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।
भर्ती परीक्षा 6 जनवरी 2019 को आयोजित हुई थी। इसके बाद 7 जनवरी 2019 को सामान्य वर्ग के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत न्यूनतम अर्हता अंक निर्धारित किए गए थे। इस व्यवस्था को इलाहाबाद हाईकोर्ट और बाद में 18 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने भी वैध ठहराया था।
1.46 लाख अभ्यर्थी हुए थे सफल
सरकार के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में 4,31,466 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 4,09,530 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें 1,46,060 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए।
एक जून 2020 को गुणवत्ता अंकों के आधार पर 67,867 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई। अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के 1,133 पद पात्र अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण रिक्त रह गए थे।
आरक्षण व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद
भर्ती प्रक्रिया के दौरान मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (एमआरसी) और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के सामान्य वर्ग में समायोजन को लेकर विवाद शुरू हुआ। जनवरी 2022 में जारी 6,800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों की चयन सूची पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
मार्च 2023 में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने चयन सूची में संशोधन और अतिरिक्त चयन सूची निरस्त करने का आदेश दिया। हालांकि अगस्त 2024 में खंडपीठ ने इस आदेश को रद्द करते हुए 69 हजार पदों के लिए नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया।
नई मेरिट सूची पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
खंडपीठ के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद 9 सितंबर 2024 को शीर्ष अदालत ने नई मेरिट सूची लागू करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
इसके बाद 4 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से ऐसा समाधान तलाशने का सुझाव दिया था, जिससे विवाद का व्यावहारिक निपटारा हो सके।
रिक्त पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने 19 मई को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यदि संशोधित मेरिट सूची में नए पात्र अभ्यर्थी सामने आते हैं तो उन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्त किया जा सकता है। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
सरकार ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अब अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा।
सुनवाई पर टिकी हजारों अभ्यर्थियों की नजर
करीब छह वर्षों से चल रहे इस विवाद का असर हजारों चयनित और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों पर पड़ा है। ऐसे में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर शिक्षकों, अभ्यर्थियों और राज्य सरकार की निगाहें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि अदालत के निर्णय से इस लंबे समय से लंबित भर्ती विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।
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