गांवों से निकलेंगे IAS-PCS और डॉक्टर, यूपी की 11,350 ग्राम पंचायतों में खुल रहीं हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी

उत्तर प्रदेश सरकार गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए शिक्षा की तस्वीर बदलने की तैयारी में है। 11,350 ग्राम पंचायतों में हाईटेक लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं, जहां ग्रामीण छात्र UPSC, NEET, SSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आधुनिक संसाधनों के साथ कर सकेंगे।

लखनऊ। कभी शहरों तक सीमित रहने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अब गांवों के पंचायत भवनों में भी संभव हो रही है। उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति के तहत गांव-गांव में हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं। इन लाइब्रेरियों में बैठकर ग्रामीण युवा अब UPSC, PCS, NEET, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक या भौगोलिक कारणों से शहरों तक न पहुंच पाने वाले छात्रों को गांव में ही आधुनिक शिक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए पंचायती राज विभाग और केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।

पंचायत भवनों में बदल रही शिक्षा की तस्वीर

जहां पहले पंचायत भवनों में केवल बैठकें और सरकारी कामकाज होते थे, वहीं अब कई जगह ये भवन डिजिटल शिक्षा केंद्रों में बदल रहे हैं। यहां कंप्यूटर स्क्रीन, स्मार्ट टीवी, इंटरनेट सुविधा और डिजिटल अध्ययन सामग्री के माध्यम से छात्र आधुनिक तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं।

इन डिजिटल लाइब्रेरियों में छात्रों को किताबों के साथ-साथ ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑनलाइन पाठ्य सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

11,350 ग्राम पंचायतों में तैयार हो रही डिजिटल लाइब्रेरी

उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार, पहले चरण में चयनित 11,350 ग्राम पंचायतों के पंचायत भवनों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं।

प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी में—

  • कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा
  • प्रिंटर और यूपीएस
  • स्मार्ट टीवी
  • आधुनिक फर्नीचर
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें
  • ई-बुक्स और डिजिटल कंटेंट

की व्यवस्था की जा रही है।

सरकार का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों, किशोरों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और गांवों में पढ़ाई का बेहतर माहौल तैयार करना है।

शहर जैसी सुविधाएं अब गांव में

पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। महंगी कोचिंग फीस, रहने का खर्च और सीमित संसाधन ग्रामीण छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बनते थे।

अब गांव में ही डिजिटल लाइब्रेरी मिलने से छात्रों का समय और पैसा दोनों बच रहा है। पंचायत भवनों में उपलब्ध वाई-फाई, कंप्यूटर, प्रतियोगी पुस्तकों और शांत वातावरण से ग्रामीण युवा बेहतर तैयारी कर पा रहे हैं।

डिजिटल लाइब्रेरी से मिली सफलता की कहानी

मथुरा जिले की अड़ीग ग्राम पंचायत के निवासी टीटू शर्मा इसका उदाहरण हैं। टीटू शर्मा ने पंचायत की डिजिटल लाइब्रेरी में नियमित अध्ययन कर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

उन्होंने बताया कि वह करीब डेढ़ वर्ष से इस लाइब्रेरी का उपयोग कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि उन्होंने UPSI और SSC जैसी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की।

उनका कहना है कि पहले पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरी किताबें, इंटरनेट और अध्ययन का अच्छा माहौल मिलता है।

20 हजार से अधिक डिजिटल अध्ययन सामग्री होगी उपलब्ध

डिजिटल लाइब्रेरियों में छात्रों के लिए बड़ी मात्रा में ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें—

  • ई-बुक्स
  • वीडियो लेक्चर
  • ऑडियो कंटेंट
  • इंटरैक्टिव क्विज
  • डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल शामिल हैं।

सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण युवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बेहतर अवसर मिलेंगे।

हर डिजिटल लाइब्रेरी पर 4 लाख रुपये का निवेश

सरकार प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी के विकास पर करीब 4 लाख रुपये खर्च कर रही है।

इसमें—

  • करीब 2 लाख रुपये की पुस्तकें
  • 1.30 लाख रुपये के आईटी उपकरण
  • करीब 70 हजार रुपये का आधुनिक फर्नीचर शामिल है।

इन लाइब्रेरियों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि छात्र पारंपरिक पुस्तकों के साथ डिजिटल माध्यमों से भी अध्ययन कर सकें।

10,674 पंचायतों में पहुंच चुकी हैं किताबें

पंचायती राज विभाग के अनुसार अब तक—

  • 10,674 ग्राम पंचायतों में पुस्तकों की आपूर्ति पूरी हो चुकी है।
  • 9,610 ग्राम पंचायतों में आधुनिक फर्नीचर लगाया जा चुका है।

इसके अलावा आईटी उपकरणों की स्थापना और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है।

ग्राम प्रधान और सचिव करेंगे संचालन

डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की निगरानी में किया जाएगा। विभागीय अधिकारी समय-समय पर इनकी मॉनिटरिंग करेंगे।

सरकार का लक्ष्य है कि सभी ग्राम पंचायतों को ज्ञान, तकनीक और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

36 जिलों में पूरी हुई किताब और फर्नीचर की व्यवस्था

प्रदेश के कई जिलों में डिजिटल लाइब्रेरी की तैयारी तेज हो चुकी है। इनमें—

अयोध्या, हरदोई, उन्नाव, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर नगर, वाराणसी, जौनपुर, लखीमपुर खीरी, गाजियाबाद, आगरा, सहारनपुर, अमेठी, प्रतापगढ़ सहित 36 जिले शामिल हैं।

इन जिलों में पुस्तकों और आधुनिक फर्नीचर की आपूर्ति पूरी की जा चुकी है।

ग्रामीण शिक्षा में नई शुरुआत

डिजिटल लाइब्रेरी योजना केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों में शिक्षा के स्वरूप को बदलने की कोशिश है। यदि यह व्यवस्था पूरी तरह सफल होती है तो आने वाले वर्षों में छोटे गांवों से भी बड़ी संख्या में IAS, PCS अधिकारी, डॉक्टर और अन्य पेशेवर निकल सकते हैं।

गांवों में खुल रही ये डिजिटल लाइब्रेरियां ग्रामीण युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती हैं।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button