“₹2000 से ऊपर के UPI बिजनेस पेमेंट पर 0.25% से 0.4% तक MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव सामने आया है। जानिए किन ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क लागू हो सकता है, किन लोगों पर इसका असर नहीं पड़ेगा और सरकार ने क्या कहा है।“
नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए किए जाने वाले बड़े व्यापारिक भुगतान (Business Payments) पर भविष्य में शुल्क लग सकता है। केंद्र सरकार ने संसद में पेश टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के जरिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो ₹2,000 से अधिक के बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR लगाया जा सकता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर पर लागू नहीं होगा।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश संशोधन विधेयक में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर MDR वसूलने से जुड़े प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे कब तथा किस स्वरूप में लागू किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
किन ट्रांजैक्शन पर लग सकता है चार्ज?
प्रस्ताव के अनुसार, केवल व्यापारियों (Merchant Payments) को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लागू हो सकता है। अनुमानित शुल्क 0.25% से 0.4% के बीच हो सकता है।
वहीं, एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे, जैसे परिवार, मित्र या परिचितों के बीच होने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर, पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे।
रोजमर्रा के भुगतान पर नहीं पड़ेगा असर
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि दूध, सब्जी, किराना, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या अन्य छोटे भुगतान जैसे अधिकांश दैनिक लेनदेन इस प्रस्ताव से प्रभावित नहीं होंगे। ₹2,000 की सीमा तय होने के कारण बड़ी संख्या में छोटे भुगतान पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेंगे।
सिर्फ 5% ट्रांजैक्शन पर असर, लेकिन वैल्यू 65% से अधिक
आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन कुल लेनदेन की संख्या का केवल लगभग 5 प्रतिशत हैं, लेकिन इनकी हिस्सेदारी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में करीब 65 प्रतिशत है। यानी प्रस्ताव का असर सीमित संख्या के लेनदेन पर होगा, लेकिन उच्च मूल्य वाले भुगतान इससे प्रभावित हो सकते हैं।
जुलाई में रिकॉर्ड UPI लेनदेन
जुलाई 2026 में देशभर में 23.7 अरब UPI ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रही। अधिकारियों का कहना है कि यदि MDR लागू भी होता है, तब भी करीब 95 प्रतिशत UPI लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
क्या ग्राहकों को देना होगा शुल्क?
विशेषज्ञों का मानना है कि MDR का भुगतान तकनीकी रूप से व्यापारियों द्वारा किया जाता है। हालांकि कुछ बड़े व्यापारी इस लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जबकि कई व्यवसाय इसे स्वयं वहन भी कर सकते हैं। इसलिए सभी उपभोक्ताओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ना जरूरी नहीं है।
क्यों लाया जा रहा है यह प्रस्ताव?
UPI के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन और रखरखाव की लागत भी बढ़ रही है। सरकार और नियामक संस्थाएं इस इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही हैं। MDR को उसी दिशा में एक संभावित कदम माना जा रहा है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR लागू करने पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। फिलहाल संसद में केवल संबंधित कानूनी प्रावधान में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह तय होगा कि शुल्क कब से लागू होगा, किन श्रेणियों पर लागू होगा और इसकी वास्तविक दर क्या होगी।
प्रमुख बातें
- ₹2,000 से अधिक के बिजनेस UPI भुगतान पर MDR लगाने का प्रस्ताव।
- शुल्क 0.25% से 0.4% तक हो सकता है।
- सामान्य P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
- छोटे और रोजमर्रा के भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- प्रस्ताव लागू करने पर अंतिम फैसला अभी सरकार ने नहीं लिया है।







