लद्दाख-तिब्बत तुलना पर घिरे सोनम वांगचुक, बोले- ‘दुख पहुंचाने का इरादा नहीं था’, तिब्बती दोस्तों से मांगी माफी

“लद्दाख की स्थिति की चीन के कब्जे वाले तिब्बत से तुलना करने पर विवादों में घिरे सोनम वांगचुक ने माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि उनका इरादा तिब्बती दोस्तों को दुख पहुंचाना नहीं था, बल्कि लेह में हुई हिंसा की गंभीरता को सामने रखना था।“

जम्मू। लद्दाख की मौजूदा स्थिति की चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत से तुलना करने के बाद विवादों में घिरे पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने सफाई देते हुए माफी मांगी है। वांगचुक ने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य तिब्बत में रहने वाले लोगों के लंबे संघर्ष और पीड़ा को कमतर आंकना नहीं था। उनका मकसद सिर्फ लेह में पिछले वर्ष हुई हिंसा की गंभीरता को सामने रखना था।

वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि उन्हें पता चला है कि उनके बयान से कई तिब्बती दोस्त आहत हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह केवल एक खास दिन हुई एक खास घटना की तुलना कर रहे थे, न कि तिब्बत में दशकों से चली आ रही परिस्थितियों की।

‘तिब्बती दोस्तों को दुख पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था’

वांगचुक ने कहा कि वह तिब्बती लोगों के दुख-दर्द को समझते हैं और चीन के दमन का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है और वह दिल से माफी मांगते हैं।

उनके मुताबिक, वह यह बताना चाहते थे कि पिछले वर्ष लेह में जिस स्थिति का लोगों ने सामना किया, वह कितनी गंभीर थी। उन्होंने कहा कि लद्दाख भारत में हमेशा से खुशहाल रहा है, लेकिन उनके अनुसार पिछला वर्ष क्षेत्र के लिए बेहद कठिन रहा।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने जताई थी आपत्ति

वांगचुक की टिप्पणी पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) ने आपत्ति जताई थी। धर्मशाला स्थित CTA ने उनकी लद्दाख और तिब्बत की तुलना को ‘गलत और अनुचित’ बताया था। प्रशासन की ओर से कहा गया कि तिब्बत में चीन के शासन के तहत तिब्बतियों के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान को लेकर गंभीर परिस्थितियां बनी हुई हैं।

CTA की आपत्ति के बाद ही वांगचुक ने अपनी टिप्पणी का संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य तिब्बती समुदाय की पीड़ा को कम करके दिखाना नहीं था।

लेह हिंसा की बरसी पर उठाया था मुद्दा

सोनम वांगचुक ने यह टिप्पणी 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा की पहली बरसी के मौके पर की थी। उस घटना में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। 2026 में बरसी के मौके पर लद्दाख में इस घटना को लेकर फिर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

वांगचुक ने इस दौरान लद्दाख के लोगों की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से क्षेत्र की मांगों पर ध्यान देने और पिछले वर्ष की हिंसा की जांच से जुड़ी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

‘भारत को लोकतंत्र के कारण चुना था’

लेह में अपने भाषण के दौरान वांगचुक ने कहा था कि लद्दाख के सामने भारत और चीन दोनों विकल्प मौजूद थे और भारत को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और सम्मानजनक जीवन की उम्मीद थी। उन्होंने इसी संदर्भ में लद्दाख की मौजूदा स्थिति की तुलना तिब्बत से की थी। उनकी इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई।

वांगचुक ने कहा- तुलना का संदर्भ समझना जरूरी

अब सफाई देते हुए वांगचुक ने कहा है कि उनकी टिप्पणी को तिब्बत में रहने वाले लोगों की दशकों पुरानी पीड़ा के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि वह केवल लेह में हुई एक विशेष घटना की भयावहता को रेखांकित कर रहे थे।

उनकी माफी के बाद विवाद में उनका पक्ष सामने आ गया है, जबकि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की ओर से पहले ही इस तुलना को लेकर असहमति दर्ज कराई जा चुकी है।

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