G7 समिट 2026: पश्चिम एशिया संकट पर अलग से सत्र, भारत और अमेरिका होंगे शामिल

फ्रांस में होने वाले सम्मेलन में होर्मुज स्ट्रेट और समुद्री सुरक्षा पर होगी बड़ी चर्चा

फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन 2026 में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षा पर विशेष सत्र होगा। इसमें भारत, अमेरिका और कई अरब देशों को आमंत्रित किया गया है, जहां पीएम मोदी भी शामिल होंगे।

नई दिल्ली। आगामी G7 शिखर सम्मेलन में इस बार पश्चिम एशिया संकट को लेकर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। फ्रांस में होने वाले इस सम्मेलन में भारत, अमेरिका और कई अरब देशों को भी आमंत्रित किया गया है।

इस महत्वपूर्ण सत्र में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा होने की संभावना है।

 भारत और अमेरिका भी होंगे शामिल

इस विशेष सत्र में भारत और अमेरिका के नेता भी भाग लेंगे। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई, कतर और मिस्र जैसे देशों को भी आमंत्रण भेजा गया है।

मुख्य एजेंडा होगा—

  • पश्चिम एशिया में जारी तनाव
  • होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित समुद्री आवाजाही
  • वैश्विक ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा

 होर्मुज स्ट्रेट पर भारत का रुख

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा नहीं चाहता। भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों में निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए, क्योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

 भारत को मिला खास महत्व

फ्रांस ने भारत को इस सम्मेलन के सभी प्रमुख ट्रैक्स में शामिल किया है। फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार भारत के साथ संबंध “विश्वास और रणनीतिक साझेदारी” पर आधारित हैं।

 इन मुद्दों पर भी फोकस

G7 सम्मेलन में इस बार कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी—

  • वैश्विक आर्थिक असंतुलन
  • आपूर्ति श्रृंखला (क्रिटिकल मिनरल्स)
  • साइबर सुरक्षा
  • संगठित अपराध
  • अंतरराष्ट्रीय संकट समाधान

 पीएम मोदी की लगातार भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार G7 सम्मेलन में शामिल होंगे। इस बार उनकी यात्रा 14 से 18 जून तक होगी और इसमें फ्रांस के साथ स्लोवाकिया का भी दौरा शामिल है।

 क्यों अहम है यह बैठक?

पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा संकट के बीच यह बैठक वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत की सक्रिय भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उसकी भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

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