“UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान पर भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब दिया। पेटल गहलोत ने कश्मीर, आतंकवाद और पाकिस्तान की नीतियों पर भारत का पक्ष रखा।“
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान के बाद भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत कड़ा जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के बयानों को खारिज करते हुए आतंकवाद, कश्मीर और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। यह प्रतिक्रिया 25 सितंबर की रात शरीफ के महासभा में संबोधन के बाद आई।
गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा बार-बार दोहराए जाने वाले दावों से वे सच नहीं बन जाते। उन्होंने भारत की ओर से कहा कि पाकिस्तान का आतंकवाद और उसका कथित छल-दोहरा रवैया उसके लिए या दुनिया के लिए लाभकारी नहीं होगा।
‘जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा’
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दे का उल्लेख करते हुए दक्षिण एशिया में भविष्य में संघर्ष की स्थिति से बचने के लिए कश्मीर विवाद के न्यायसंगत समाधान की बात कही थी।
इसके जवाब में गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में स्थिति का उल्लेख करते हुए वहां के लोगों के अधिकारों और हिंसा से जुड़े मुद्दे उठाए।
भारत ने पाकिस्तान से जुड़े इन आरोपों को अपने राइट ऑफ रिप्लाई में रखा, जबकि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर के मुद्दे पर अलग रुख प्रस्तुत करता रहा है। ऐसे बयानों पर दोनों देशों की स्थिति में स्पष्ट अंतर बना हुआ है।
आतंकवाद को लेकर भारत की चेतावनी
गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के भारत के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने पर उसके परिणाम होंगे।
भारत की ओर से यह भी कहा गया कि पिछले वर्ष आतंकवादी हमले के बाद भारत ने आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई की थी। गहलोत ने इसे भारत के आत्मरक्षा के अधिकार के संदर्भ में प्रस्तुत किया।
संयुक्त राष्ट्र भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्राथमिकताओं में रखता है। सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर आतंकवादी कृत्यों से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को होने वाले खतरों पर चर्चा की थी।
9/11 का जिक्र कर पाकिस्तान पर निशाना
भारतीय प्रतिनिधि ने अपने जवाब में 9/11 आतंकी हमले का भी संदर्भ दिया। गहलोत ने कहा कि न्यूयॉर्क और दुनिया ने हाल ही में 9/11 हमले की 25वीं बरसी मनाई है और इसी संदर्भ में पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के इतिहास पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने ओसामा बिन लादेन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान में सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। यह टिप्पणी पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर भारत की ओर से उठाए गए सवालों का हिस्सा थी।
पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी टिप्पणी
गहलोत ने शहबाज शरीफ के लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों से जुड़े बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में सेना की भूमिका को लेकर टिप्पणी की और कहा कि वहां सत्ता के वास्तविक नियंत्रण को लेकर भारत का आकलन अलग है।
उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे देश के सैन्य नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान सामने आए हैं। यह टिप्पणी भारत के उस तर्क का हिस्सा थी जिसमें उसने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।
अल्पसंख्यकों और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया
भारत ने पाकिस्तान के मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि जिस शासन पर भारत धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर आरोप लगाता है, उसके बयानों को उसके अपने रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से मानवाधिकार और धार्मिक सहिष्णुता पर दिए गए बयानों के बावजूद भारत पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाता रहा है।
UN में भारत-पाकिस्तान के बीच फिर दिखा तीखा मतभेद
संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के बयानों से एक बार फिर कश्मीर, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच गहरे मतभेद सामने आए। भारत ने अपने राइट ऑफ रिप्लाई में आतंकवाद के मुद्दे को केंद्र में रखा, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कश्मीर और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का उल्लेख किया था।
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न हिस्सा है और आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का उसका अधिकार कायम है। वहीं, पाकिस्तान कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर दोनों देशों के रुख लंबे समय से अलग रहे हैं।
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