प्रयागराज में 20 साल पुराने पार्क कब्जे की फिर खुली फाइल, आजम खान का नाम आने पर SIT जांच

प्रयागराज के दरियाबाद में 20 साल पुराने पार्क की जमीन और सड़क पर कब्जे के मामले में पूर्व मंत्री आजम खान का नाम सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीएम ने SIT गठित कर जांच शुरू कराई है।

प्रयागराज। शहर के दरियाबाद मोहल्ले में करीब 20 साल पुराने पार्क की जमीन और उससे सटी 20 फीट चौड़ी सड़क पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले में पूर्व मंत्री आजम खान का नाम सामने आने के बाद शासन स्तर पर भी गंभीरता दिखाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

एसआईटी में एडीएम सिटी सत्यम कुमार मिश्र, प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) के सचिव विनीत कुमार सिंह और डीसीपी सिटी मनीष शांडिल्य को शामिल किया गया है। टीम को मामले से जुड़े राजस्व और अन्य अभिलेखों की जांच कर पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने लाने की जिम्मेदारी दी गई है।

2006 में शुरू हुआ था विवाद

बताया जा रहा है कि यह मामला वर्ष 2006 का है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और आजम खान प्रदेश के नगर विकास मंत्री थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, अगस्त 2006 में तीन सार्वजनिक अवकाशों के दौरान पार्क की जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

आरोप है कि माफिया अतीक अहमद के करीबियों ने पार्क की जमीन पर कब्जा करना शुरू किया। स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध करते हुए संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उस समय तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खान के प्रभाव के चलते अधिकारियों ने कब्जे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता अब विशेष जांच दल की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। एसआईटी मामले से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और उस समय की प्रशासनिक कार्रवाई की जांच करेगी।

चार करोड़ रुपये की बताई जा रही जमीन

स्थानीय लोगों के अनुसार पार्क की जमीन की मौजूदा कीमत करीब चार करोड़ रुपये है। यह स्थान क्षेत्र के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पार्क में पहले बच्चे खेलते थे और बुजुर्ग सुबह-शाम टहलने के लिए आते थे।

लंबे समय से जमीन पर कथित कब्जे के कारण स्थानीय लोगों को पार्क की सुविधा से वंचित होना पड़ा। अब शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद एक बार फिर इस जमीन को कब्जामुक्त कराने की उम्मीद जगी है।

मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में पहुंचा मामला

स्थानीय लोगों ने पिछले दिनों महापौर गणेश केसरवानी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर मामले की शिकायत की थी। लोगों ने मुख्यमंत्री को बताया कि जिस जमीन पर पार्क था, वहां लंबे समय से कब्जा है। उन्होंने पार्क की जमीन को कब्जामुक्त कराकर दोबारा जनहित में इस्तेमाल करने की मांग की।

मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में की गई शिकायत के बाद शासन से जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया। इसके बाद डीएम ने एसआईटी का गठन किया है।

सदर तहसील और नगर निगम से मांगे गए अभिलेख

जांच को आगे बढ़ाने के लिए सदर तहसील और नगर निगम से संबंधित राजस्व अभिलेख मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि जमीन का वास्तविक स्वरूप क्या था, उसका राजस्व रिकॉर्ड में क्या दर्ज है और वर्ष 2006 में कब्जे की शिकायत के बाद प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।

इसके अलावा पार्क से सटी 20 फीट चौड़ी सड़क की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। एसआईटी जमीन के स्वामित्व, उपयोग और कब्जे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।

करीबी लोगों के कब्जे में होने का दावा

स्थानीय लोगों का दावा है कि पार्क की जमीन पर जिन लोगों ने कब्जा किया है, वे आजम खान के करीबी बताए जाते हैं। उनका कहना है कि आजम खान जब भी प्रयागराज आते थे तो कथित तौर पर इन लोगों के घर जाते थे। हालांकि, इन दावों की भी जांच की जानी है और एसआईटी की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

प्रशासन की ओर से फिलहाल जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचा जा रहा है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में की गई शिकायत के संबंध में शासन से मिले पत्र के आधार पर विशेष जांच दल का गठन किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की उम्मीद

एसआईटी जांच के बाद यदि जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो प्रशासन की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच पूरी होने के बाद पार्क की जमीन को कब्जामुक्त कराकर उसे दोबारा सार्वजनिक उपयोग में लाया जाएगा।

करीब दो दशक पुराने इस मामले में अब एसआईटी जांच से यह भी सामने आने की उम्मीद है कि पार्क की जमीन पर कब्जे की शुरुआत कैसे हुई, उस समय शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और जमीन को कब्जे से मुक्त कराने में अब तक क्या बाधाएं सामने आती रही हैं।

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