“लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वतंत्र तकनीकी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।“
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एक्सप्रेसवे की दुर्दशा का मुद्दा उठाते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने और इसे जनहित में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संज्ञान में लाने की मांग की है।
अजय राय ने अपने पत्र में दावा किया कि करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज छह दिन बाद ही धंसने लगा और सड़क पर बड़े गड्ढे दिखाई देने लगे। कांग्रेस नेता ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जल निकासी से लेकर क्रैश बैरियर तक पर सवाल
अजय राय ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे पर जल निकासी की व्यवस्था खराब है। इसके अलावा पुलों के कुछ हिस्सों और क्रैश बैरियर में भी दरारें आने की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि मरम्मत के बाद भी एक्सप्रेसवे के दोबारा खराब होने की खबरें सामने आ रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इन तमाम मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
ठेकेदार कंपनी को लेकर भी लगाए आरोप
अजय राय ने पत्र में निर्माण करने वाली ठेकेदार कंपनी को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कंपनी का संबंध भाजपा के एक राज्यसभा सांसद के भाई से है और इसी वजह से उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, ये कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इनके संबंध में स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख दिए गए विवरण में नहीं है।
पीएम मोदी से स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष इस मामले को उठाएं। उन्होंने एक्सप्रेसवे की स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
अजय राय का कहना है कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच से निर्माण में सामने आई खामियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





