“लखनऊ में UPSSSC की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा में ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल कराने के प्रयास का खुलासा हुआ है। पुलिस ने अभ्यर्थी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के तार प्रयागराज तक पहुंचे हैं।“
लखनऊ: प्रतियोगी परीक्षा में नकल कराने वाले नेटवर्क का खुलासा
उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल खड़े करने वाले एक और मामले का लखनऊ में खुलासा हुआ है। UPSSSC की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा के दौरान महानगर क्षेत्र स्थित परीक्षा केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के जरिए नकल कराने की कोशिश पकड़ी गई।
एसटीएफ और महानगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पहले एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस लखनऊ से प्रयागराज तक पहुंची। मामले में दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
परीक्षा केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ पकड़ा गया अभ्यर्थी
पुलिस के मुताबिक, बृजेश कुमार यादव उर्फ बब्लू परीक्षा केंद्र में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के माध्यम से नकल करने की तैयारी में था। समय रहते उसे पकड़ लिया गया।
अभ्यर्थी के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर, संपर्कों और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। इसी जांच में प्रयागराज निवासी रमेश चंद्र पटेल और सत्यप्रकाश यादव के नाम सामने आए।
होटल के रजिस्टर से मिला अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बृजेश कुमार यादव निशातगंज चौराहे के पास स्थित अमित होटल में एक साथी के साथ ठहरा था। पुलिस ने होटल का रजिस्टर खंगाला तो सीरियल नंबर 2098 में बृजेश के साथ सत्यप्रकाश यादव के ठहरने की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने होटल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। इसी आधार पर सत्यप्रकाश की तलाश शुरू की गई। उसे दयानंद इंटर कॉलेज के पास अपने साथी का इंतजार करते हुए पकड़ लिया गया।
पूछताछ के बाद पुलिस सत्यप्रकाश को लेकर प्रयागराज पहुंची, जहां संगम रेलवे स्टेशन के सामने रमेश चंद्र पटेल को बुलाकर पूछताछ की गई। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
13 लोगों की मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाणपत्र बरामद
पुलिस के अनुसार, रमेश चंद्र पटेल के कब्जे से अलग-अलग लोगों के नाम की 13 मार्कशीट और शैक्षणिक प्रमाणपत्र मिले हैं। इसके अलावा पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कार्ड समेत कई दस्तावेज बरामद किए गए।
पुलिस इन दस्तावेजों की भूमिका और इनके जरिए कथित तौर पर किस तरह का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था, इसकी जांच कर रही है।
चार मोबाइल, चार सिम और पांच ब्लैंक चेक मिले
आरोपियों के पास से पुलिस ने कुल चार मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा पांच ब्लैंक चेक, दो चेकबुक और 50 हजार रुपये नकद भी मिले हैं।
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़े सामान को भी कब्जे में लिया है। अब मोबाइल फोन, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है।
नौकरी लगवाने के नाम पर पांच लाख रुपये की बातचीत
पूछताछ में कथित नौकरी के नाम पर पैसों के लेनदेन की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, रमेश चंद्र पटेल ने पूछताछ में बताया कि बृजेश कुमार यादव की नौकरी लगवाने के लिए पांच लाख रुपये में बातचीत हुई थी।
पुलिस के मुताबिक, इस रकम में रमेश को एक लाख रुपये कमीशन मिलने की बात कही गई थी। बरामद 50 हजार रुपये वह सत्यप्रकाश यादव को देने के लिए लेकर आया था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों की कथित डील में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।
मोबाइल की जांच से सामने आएंगे नेटवर्क के और नाम
पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच कर रही है। कॉल डिटेल, संपर्कों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संपर्क किन अभ्यर्थियों और अन्य संदिग्ध लोगों से था।
पुलिस को आशंका है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए परीक्षा केंद्र के अंदर बैठे अभ्यर्थी को बाहर से उत्तर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। जांच के दौरान ऐसे अन्य मामलों और अभ्यर्थियों से जुड़े कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं।
दो अन्य वांछित आरोपियों की तलाश
मामले में बृजेश कुमार यादव के अलावा रमेश चंद्र पटेल और सत्यप्रकाश यादव को गिरफ्तार किया गया है। विवेचना के दौरान दो अन्य वांछित लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने आने के बाद मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
BNS और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा
मामले में थाना महानगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 318(4) और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा 13(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इंस्पेक्टर अलीगंज अखिलेश मिश्रा के मुताबिक, UPSSSC की स्नातक स्तरीय मुख्य परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ के माध्यम से नकल कराने की कोशिश सामने आई थी। परीक्षा केंद्र से एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार करने के बाद उसकी निशानदेही और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
लखनऊ से प्रयागराज तक जांच, पूरे नेटवर्क पर नजर
पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि मामले की जांच अब सिर्फ परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं है। लखनऊ में पकड़े गए अभ्यर्थी से शुरू हुई पड़ताल प्रयागराज तक पहुंची है। बरामद दस्तावेज, मोबाइल फोन, सिम, चेक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अभ्यर्थियों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को पास कराने की कोशिश करने वाले पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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