“अमित शाह ने घुसपैठ के खिलाफ सरकार की रणनीति बताते हुए कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। केंद्र और राज्य मिलकर देश को घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए चार सूत्रीय रणनीति पर काम करेंगे।“
नई दिल्ली। अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार केवल उसके नागरिकों को है। उन्होंने कहा कि सरकार बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
5
इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी कॉन्फ्रेंस (NSSC) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि अवैध घुसपैठ को केवल सीमा प्रबंधन की समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और देश के जनसांख्यिकीय संतुलन पर पड़ सकता है।
सीमा से लगे राज्यों के साथ बनाई जा रही रणनीति
अमित शाह ने बताया कि पिछले आठ महीनों के दौरान केंद्र सरकार ने सभी भूमि सीमाओं से लगे राज्यों का दौरा किया है। इस दौरान राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा को लेकर एक दस्तावेज साझा किया गया है, जिसमें घुसपैठ से निपटने के लिए चार सूत्रीय दृष्टिकोण रखा गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए अवैध घुसपैठ की पहचान और उसके खिलाफ कार्रवाई को मजबूत किया जाएगा। उनका लक्ष्य देश को जल्द से जल्द घुसपैठियों से मुक्त बनाना है।
आंतरिक सुरक्षा को विकास की पहली शर्त बताया
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होना सबसे जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि भारत को हर क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी है तो आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा। इसके लिए भविष्य में सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान पहले से करना और उनसे निपटने की रणनीति तैयार करना जरूरी है।
नशा, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की चुनौतियों का किया जिक्र
गृह मंत्री ने कहा कि देश ने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी तीन बड़ी चुनौतियों-नशीले पदार्थों की तस्करी, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं पर महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने इसके लिए राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के योगदान को श्रेय दिया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को केवल वर्तमान चुनौतियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सुरक्षा रणनीति में अगले 15 से 20 वर्षों के संभावित खतरों का भी अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि किसी चुनौती के गंभीर रूप लेने से पहले ही उससे निपटा जा सके।
साइबर और फेक न्यूज से लेकर कट्टरपंथ तक पर नजर
अमित शाह ने बदलते वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए ऊर्जा और संसाधनों की सुरक्षा, सप्लाई चेन में व्यवधान, बढ़ते कट्टरपंथ, साइबर युद्ध और गलत सूचना के प्रसार को भविष्य की प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों में शामिल किया।
उन्होंने कहा कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए देश की भविष्य की सुरक्षा नीति तैयार करनी होगी। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है जिसमें किसी खतरे के बड़े संकट में बदलने से पहले ही उसकी पहचान कर ली जाए।
एआई से मजबूत होगा खुफिया तंत्र
गृह मंत्री ने खुफिया जानकारी के बेहतर इस्तेमाल के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि CCTNS, ICJS, NatGrid और NAFIS जैसे सिस्टम को जोड़कर एक एकीकृत डेटा इकोसिस्टम तैयार किया गया है।
उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों से अपील की कि वे एआई की मदद से बड़े पैमाने पर उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करें, अपराधियों के तौर-तरीकों की पहचान करें और उससे कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी तैयार करें।
2019 से 2026 के बीच 274 भगोड़ों की वापसी
अमित शाह ने विदेशों में मौजूद भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस लाया गया है।
उन्होंने सभी राज्यों से विदेश में मौजूद भगोड़ों को भारतीय कानून के दायरे में लाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
‘खतरे को संकट बनने से पहले खत्म करना लक्ष्य’
अमित शाह ने कहा कि सरकार की रणनीति किसी खतरे के बड़ा संकट बनने का इंतजार करने की नहीं, बल्कि शुरुआती स्तर पर उसकी पहचान कर उसे खत्म करने की है।
उन्होंने कहा कि मजबूत खुफिया तंत्र, तकनीक के इस्तेमाल, केंद्र-राज्य समन्वय और भविष्य की चुनौतियों की पहले से पहचान के जरिए एक सुरक्षित, घुसपैठ मुक्त और नशामुक्त भारत का निर्माण किया जा सकता है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”









