“Operation Sindoor: पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने बताया कि 29 अप्रैल की PM Modi की बैठक में पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाने और ‘सोच के बाहर’ कार्रवाई का फैसला हुआ था।“
नई दिल्ली। Operation Sindoor से पहले 29 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का फैसला लिया गया था। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में उस बैठक से जुड़े कई महत्वपूर्ण विवरण साझा किए।
जनरल चौहान ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि भारत सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और पाकिस्तान को ऐसा जवाब दिया जाना चाहिए, जिसकी उसने कल्पना भी न की हो।
PM Modi ने कहा था- अपने समय पर करें कार्रवाई
पूर्व CDS के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा बलों को कार्रवाई के लिए जल्दबाजी न करने की छूट दी थी। उन्होंने कहा था कि कार्रवाई अपने समय पर की जाए, लेकिन इसमें मानवीय या तकनीकी कारणों से विफलता की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। साथ ही कार्रवाई के सबूत भी होने चाहिए।
जनरल चौहान ने बताया कि शुरुआत में इस बात को लेकर संशय था कि क्या आधी रात के अंधेरे में लक्ष्यों पर हमला कर उसके पुख्ता सबूत जुटाए जा सकते हैं। हालांकि, सेना को अपनी क्षमताओं पर भरोसा था और रात में कार्रवाई करने का फैसला किया गया। इससे अभियान में सरप्राइज एलिमेंट बनाए रखने में मदद मिली।
Bahawalpur को टारगेट सूची में क्यों जोड़ा गया?
जनरल चौहान ने बताया कि 29 अप्रैल की बैठक में Bahawalpur को भी लक्ष्य सूची में शामिल किया गया था। इसे शामिल करने पर रक्षा मंत्री की ओर से जोर दिया गया था। प्रधानमंत्री ने बैठक में बड़ा कदम उठाने की बात कही थी।
Bahawalpur काफी दूर स्थित लक्ष्य था। ऐसे में इसे निशाना बनाने के लिए वायु शक्ति का इस्तेमाल जरूरी हो गया। जनरल चौहान के मुताबिक, केवल ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन के जरिए वहां तक पहुंचना और सफलता सुनिश्चित करना संभव नहीं था।
23 से 29 अप्रैल के बीच लगातार हुईं बैठकें
पूर्व CDS ने बताया कि 23 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच सैन्य नेतृत्व और सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर लगातार बैठकें हुईं। चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी की चार से पांच बैठकें हुईं और इतनी ही बार NSA के साथ भी चर्चा की गई।
इस दौरान सैन्य कार्रवाई के अलावा कूटनीति और आर्थिक शक्ति समेत भारत के अन्य विकल्पों पर भी विचार किया गया। विभिन्न विकल्पों को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के सामने रखा गया और इसके बाद सैन्य कार्रवाई की दिशा तय हुई।
टारगेट की पहचान बनी बड़ी चुनौती
जनरल चौहान ने कहा कि Operation Sindoor के दौरान लक्ष्यों की पहचान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी। कुछ आतंकी ठिकाने खाली कर दिए गए थे, कुछ दोबारा सक्रिय हुए और कुछ को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया था।
ऐसे में खुफिया एजेंसियों और सैन्य खुफिया तंत्र के बीच लगातार यह आकलन किया जा रहा था कि किन आतंकी शिविरों को निशाना बनाया जाना चाहिए।
7 मई 2025 को हुई थी बड़ी कार्रवाई
भारत ने 7 मई 2025 की सुबह Operation Sindoor के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचे से जुड़े नौ ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें मुरीदके स्थित Markaz Taiba और Bahawalpur स्थित Markaz Subhanallah भी शामिल थे।
पूर्व CDS के अनुसार, अभियान का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन Operation Sindoor अभी भी जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में हर समय 100 प्रतिशत तैयारी संभव नहीं होती। दुश्मन का आकलन भी लगातार बदलता रहता है, इसलिए रणनीति में भी लगातार बदलाव जरूरी है।
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