यूपी में गन्ना किसानों को बड़ी राहत, पेराई सत्र से पहले मिलेगा पूरा हिसाब-किताब; ऑनलाइन होगा गन्ना कैलेंडर

यूपी में गन्ना किसानों को पेराई सत्र से पहले ही रकबा, उत्पादन और गन्ना आपूर्ति पर्चियों की जानकारी ऑनलाइन मिलेगी। ‘केनयूपी.इन’ पोर्टल पर कैलेंडर जारी होगा।

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब किसानों को चीनी मिलों में पेराई शुरू होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही उन्हें अपने खेत में दर्ज गन्ने के रकबे, अनुमानित उत्पादन और पूरे सत्र में मिलने वाली आपूर्ति पर्चियों की जानकारी मिल जाएगी। गन्ना विभाग सर्वे के बाद तैयार किए जा रहे आंकड़ों को अंतिम रूप देने में जुटा है।

अंतिम गन्ना कैलेंडर चीनी मिलों का संचालन शुरू होने से पहले ‘केनयूपी.इन’ पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसान घर बैठे अपने गन्ने से जुड़ा पूरा लेखा-जोखा देख सकेंगे।

10,536 हेक्टेयर में गन्ने की खेती, 50 लाख क्विंटल से अधिक उत्पादन का अनुमान

बाराबंकी जिले में गन्ना सर्वे का काम पूरा हो चुका है। अब किसानवार आंकड़े पोर्टल पर दर्ज किए जा रहे हैं। सर्वे के मुताबिक जिले में इस बार गन्ने का रकबा 10,536 हेक्टेयर पहुंच गया है।

विभाग ने जिले में 50 लाख क्विंटल से अधिक गन्ना उत्पादन का अनुमान लगाया है। करीब 15 हजार किसानों के लिए लगभग 8.55 लाख तौल पर्चियां बनने की संभावना है।

इन पर्चियों की जानकारी किसानों को एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इससे किसान पहले से यह जान सकेंगे कि उन्हें किस तारीख को गन्ने की आपूर्ति करनी है।

पहले जारी होगा प्री-कैलेंडर, गलती सुधारने का भी मौका

अंतिम गन्ना कैलेंडर जारी करने से पहले विभाग प्री-कैलेंडर तैयार कर रहा है। इसमें किसान के दर्ज रकबे, अनुमानित उत्पादन और गन्ना आपूर्ति पर्चियों से संबंधित विवरण शामिल होगा।

प्री-कैलेंडर सितंबर तक किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी किसान को अपने रिकॉर्ड में रकबे, उत्पादन या पर्चियों से संबंधित कोई गलती दिखाई देती है तो उसे उसमें सुधार कराने का अवसर मिलेगा।

इसके लिए गन्ना समितियों में किसान मेलों का आयोजन किया जाएगा। इन मेलों में किसानों की आपत्तियों और रिकॉर्ड से जुड़ी त्रुटियों का निस्तारण किया जाएगा। सुधार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम कैलेंडर जारी किया जाएगा।

31 अगस्त तक गांवों में मिलेगी जानकारी

जिला गन्ना अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार के अनुसार, बुढ़वल, हैदरगढ़, बाराबंकी और दरियाबाद सहकारी गन्ना विकास समितियों से जुड़े 563 गन्ना गांवों के किसानों द्वारा जुलाई में दिए गए संशोधनों का निस्तारण किया जा रहा है।

इसी संशोधित आंकड़े के आधार पर प्री-कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। गांवों में आयोजित किए जा रहे सट्टा प्रदर्शन मेलों के माध्यम से किसानों को उनके दर्ज रकबे, अनुमानित उत्पादन और पर्चियों की जानकारी 31 अगस्त तक उपलब्ध कराई जाएगी।

नवंबर में शुरू होगा चीनी मिलों का पेराई सत्र

जिले में चीनी मिलों का आगामी पेराई सत्र नवंबर में शुरू होने की संभावना है। विभाग की योजना के मुताबिक मिलों का संचालन शुरू होने से पहले ही अंतिम गन्ना कैलेंडर ऑनलाइन कर दिया जाएगा।

वहीं, किसानों को गन्ना आपूर्ति की पर्चियां पेराई सत्र शुरू होने से करीब 15 दिन पहले जारी की जाएंगी। पर्चियों की सूचना एसएमएस के माध्यम से भी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।

कटाई और आपूर्ति की पहले से कर सकेंगे तैयारी

गन्ना विभाग का मानना है कि किसानों को पेराई सत्र से पहले ही कैलेंडर और पर्चियों की जानकारी मिलने से उन्हें गन्ने की कटाई और मिल तक आपूर्ति की बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी। इससे अचानक पर्ची मिलने या आपूर्ति की तारीख को लेकर होने वाली परेशानी भी कम हो सकती है।

किसान ऑनलाइन पोर्टल पर अपने रिकॉर्ड की जांच कर सकेंगे और किसी तरह की विसंगति मिलने पर समय रहते संबंधित समिति में सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे।

शरदकालीन गन्ना बुआई की तैयारी करने की अपील

जिला गन्ना अधिकारी ने किसानों से शरदकालीन गन्ने की बुआई के लिए बीज की व्यवस्था अभी से करने की अपील की है। गन्ने की बुआई और फसल विकास से संबंधित जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक अथवा ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से संपर्क कर सकते हैं।

इस व्यवस्था से किसानों को गन्ने के रकबे से लेकर आपूर्ति पर्ची तक की जानकारी पहले से उपलब्ध होगी। ऑनलाइन कैलेंडर और एसएमएस सुविधा से गन्ना आपूर्ति की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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