नेपाल बाढ़ में मौत का आंकड़ा 469 पहुंचा, 178 भारतीयों समेत 1400 से अधिक लोग लापता

नेपाल बाढ़ में मृतकों की संख्या 469 पहुंच गई है। 178 भारतीयों समेत 1400 से अधिक लोग लापता हैं। नेपाल और तिब्बत में बचाव अभियान जारी है, जबकि सैकड़ों भारतीयों के भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है।

काठमांडू। नेपाल में इस सप्ताह की शुरुआत में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को मृतकों के आधिकारिक आंकड़े की पुष्टि की। इस प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के आसपास बाढ़ के पानी में बह गए या फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। दुर्गम इलाकों में संपर्क और सड़क मार्ग बाधित होने के कारण राहत एवं बचाव दलों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में बाढ़ ने सड़क और अन्य संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचाया है।

1400 से अधिक लोग अब भी लापता

नेपाल में बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध अलग-अलग आधिकारिक आंकड़ों में लापता लोगों की संख्या में अंतर सामने आ रहा है। नेपाल के आपदा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों में 910 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए गए हैं, जबकि चीन की ओर से तिब्बत क्षेत्र में 558 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।

इन आंकड़ों को मिलाकर नेपाल और सीमा पार तिब्बत में 1400 से अधिक लोगों के लापता होने की स्थिति सामने आती है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से जारी आंकड़ों में सभी लापता लोगों की राष्ट्रीयता स्पष्ट नहीं की गई है।

178 भारतीयों के लापता होने की जानकारी

नेपाल में आई बाढ़ का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, 178 भारतीय नागरिक लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो कैलाश पर्वत की यात्रा के लिए तिब्बत जा रहे थे या वहां से लौट रहे थे।

वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। मंत्रालय के आंकड़ों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी और अन्य भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसी वजह से पर्यटन बोर्ड और भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है।

त्रिशूली-1 परियोजना के 73 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, नेपाल में संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों में त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 73 कर्मचारी भी शामिल हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परियोजनाएं और संपर्क मार्ग प्रभावित होने के कारण वहां मौजूद लोगों तक पहुंच बनाना बचाव दलों के लिए चुनौती बना हुआ है।

नेपाल ने अभी तक बाढ़ में मारे गए लोगों की राष्ट्रीयता के आधार पर कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। ऐसे में मृतकों में भारतीय नागरिकों की संख्या कितनी है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता

नेपाल से सटे तिब्बती क्षेत्र में भी बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं ने गंभीर संकट पैदा किया है। चीनी अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में 558 लोग लापता हैं। चीन की ओर से भी लापता लोगों की राष्ट्रीयता के आधार पर विवरण जारी नहीं किया गया है।

इसके अलावा करीब 200 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग बताए जा रहे हैं जो कैलाश पर्वत की यात्रा पर गए थे। भारतीय अधिकारियों से संपर्क कर कई लोगों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए मदद मांगी है।

तमिलनाडु के 21 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया

बाढ़ प्रभावित तिब्बती क्षेत्र में फंसे भारतीयों को निकालने के प्रयास भी जारी हैं। गुरुवार दोपहर तक तमिलनाडु के 21 पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। उन्हें काठमांडू लाया जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, अन्य फंसे भारतीयों को भी सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

लापता लोगों में तमिलनाडु के अलावा पश्चिम बंगाल और केरल के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। परिवार अपने परिजनों की जानकारी के लिए लगातार अधिकारियों और अस्पतालों से संपर्क कर रहे हैं।

सड़कें तबाह, राहत अभियान में आ रही बाधा

बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है। इससे राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर बाढ़ का पानी और मलबा जमा होने से सामान्य आवाजाही बाधित है।

दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का सहारा लिया जा रहा है। नेपाल सरकार ने सेना और अन्य एजेंसियों को बचाव अभियान में लगाया है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

69 हवाई उड़ानों से 573 लोगों का रेस्क्यू

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बताया कि गुरुवार को 69 हवाई उड़ानों के जरिए 573 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बचाव अभियान को तेज करने के लिए सेना के साथ निजी कंपनियों के अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।

सरकार का कहना है कि मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। लापता लोगों की तलाश के साथ ही प्रभावित इलाकों में जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने और कई इलाकों में बचाव दलों के नहीं पहुंच पाने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। नेपाल और तिब्बत में प्रभावित क्षेत्रों में तलाश अभियान जारी है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे और बाढ़ के पानी के बीच लापता लोगों को खोज निकालना है। अधिकारियों की ओर से राष्ट्रीयता के आधार पर मृतकों और लापता लोगों की विस्तृत सूची जारी होने के बाद ही भारतीय नागरिकों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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