कनाडा के वित्तीय दिग्गजों से मिलीं निर्मला सीतारमण, भारत में निवेश बढ़ाने का दिया न्योता

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा की प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। बैठक में बीमा, इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और GIFT IFSC जैसे क्षेत्रों में अवसरों पर चर्चा हुई।

वाशिंगटन/टोरंटो: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कनाडा की कई प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें भारत में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है और देश में दीर्घकालिक निवेश के लिए कई महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, बैठकों में भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, विस्तृत होता बाजार, व्यापक आर्थिक स्थिरता और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल एवं भौतिक बुनियादी ढांचे पर विस्तार से चर्चा हुई।

सन लाइफ फाइनेंशियल के सीईओ से मुलाकात

निर्मला सीतारमण ने सन लाइफ फाइनेंशियल के प्रेसिडेंट एवं सीईओ केविन डी. स्ट्रेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने भारत में बीमा क्षेत्र में किए गए सुधारों और निवेश के बढ़ते अवसरों को रेखांकित किया। वित्त मंत्री ने खास तौर पर बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किए जाने का उल्लेख किया।

उन्होंने सरकार के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ (Insurance for All by 2047) के विजन की भी जानकारी दी। सीतारमण ने सन लाइफ को भारत में बीमा, एसेट मैनेजमेंट, वैकल्पिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया।

GIFT IFSC में भी निवेश के अवसर

बैठक में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT IFSC) के माध्यम से निवेश के अवसरों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कनाडाई संस्थागत निवेशकों से भारत की विकास यात्रा में ज्यादा सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि भारत की आर्थिक मजबूती के साथ बाजार का विस्तार हो रहा है और देश में डिजिटल तथा भौतिक बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारत में कई नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

Canaccord Genuity को भी निवेश बढ़ाने का आग्रह

निर्मला सीतारमण ने Canaccord Genuity के वाइस चेयर रॉड फिलिप्स और सीईओ डैन डेवियू से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच भारत और कनाडा के बीच निवेश प्रवाह को और मजबूत करने की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

वित्त मंत्री ने कंपनी को भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में निवेश के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही उन्होंने भारतीय कंपनियों को वैश्विक पूंजी तक पहुंच बनाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने और विदेशों में तकनीक व कारोबार के अधिग्रहण में सहयोग देने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश पर जोर

कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) के प्रेसिडेंट एवं सीईओ जॉन ग्राहम तथा ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान (OTPP) के प्रेसिडेंट एवं सीईओ जो टेलर के साथ हुई बैठक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर विशेष जोर रहा।

सीतारमण ने दोनों संस्थानों के भारत में लंबे समय से जारी निवेश और भरोसे की सराहना की। बातचीत में ट्रांसमिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, सड़क, बंदरगाह, शहरी बुनियादी ढांचा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में संस्थागत पूंजी के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

निजी क्रेडिट और वित्तीय सेवाओं में भी अवसर

वित्त मंत्री ने भारत में बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर मोनेटाइजेशन पाइपलाइन का भी उल्लेख किया। उन्होंने निवेशकों की सुरक्षा, नियामकीय पूर्वानुमेयता और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

इसके साथ ही प्राइवेट क्रेडिट और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में GIFT IFSC के जरिए उपलब्ध नए अवसरों को भी सामने रखा गया।

OMERS से परिवहन और रिन्यूएबल एनर्जी पर चर्चा

सीतारमण ने कनाडाई पेंशन फंड OMERS के प्रेसिडेंट एवं सीईओ ब्लेक हचेसन से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत के निवेश-अनुकूल नीतिगत माहौल, कर व्यवस्था में स्थिरता और जारी आर्थिक सुधारों पर चर्चा की।

वित्त मंत्री ने OMERS को भारत के विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक बाजारों में नए निवेश एवं साझेदारी के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया। बैठक में परिवहन, ट्रांसमिशन, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को कनाडाई पूंजी से जोड़ने की कोशिश

इन बैठकों के जरिए केंद्र सरकार का फोकस भारत की विकास यात्रा में वैश्विक और खास तौर पर कनाडाई संस्थागत पूंजी की भागीदारी बढ़ाने पर दिखाई दिया। वित्त मंत्री ने निवेशकों के सामने भारत की आर्थिक मजबूती, बढ़ते मध्यम वर्ग, इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों और सुधारों से पैदा हो रहे अवसरों को प्रमुखता से रखा।

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