मऊ के स्कूल पहुंचीं पैराग्वे की पत्रकार जाजमिन रोमेरो, बच्चों से लिया वादा- कभी नहीं छोड़ेंगे पढ़ाई

मऊ स्कूल विजिट के दौरान पैराग्वे की पत्रकार जाजमिन रोमेरो और ग्लोबल पॉलिटिक्स स्कॉलर जिओलियानो सरोब्बी ने नंदन बाल विद्या मंदिर का दौरा किया। बच्चों से संवाद कर उन्होंने पढ़ाई कभी न छोड़ने का संकल्प दिलाया।

मऊ के अमिला स्थित नंदन बाल विद्या मंदिर में गुरुवार को पैराग्वे से भारत यात्रा पर पहुंचीं पत्रकार जाजमिन रोमेरो और ग्लोबल पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स स्कॉलर जिओलियानो सरोब्बी ने भ्रमण किया। विदेशी अतिथियों के विद्यालय पहुंचने पर प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

विद्यालय परिसर में इस दौरान शैक्षणिक और सांस्कृतिक संवाद का माहौल देखने को मिला। विदेशी मेहमानों ने स्कूल की कक्षाओं, शिक्षण गतिविधियों और विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए शैक्षणिक वातावरण को करीब से देखा।

बच्चों से लिया पढ़ाई पूरी करने का वादा

भ्रमण के दौरान विदेशी अतिथियों ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों से कहा कि शिक्षा उनके भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। अतिथियों ने विद्यार्थियों से यह वादा लिया कि वे हर हाल में अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और कभी स्कूल नहीं छोड़ेंगे।

विद्यार्थियों ने भी विदेशी मेहमानों के साथ खुलकर बातचीत की। बच्चों की जिज्ञासा और सवालों ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

बच्चों ने पैराग्वे की संस्कृति और शिक्षा के बारे में पूछे सवाल

विद्यार्थियों ने अतिथियों से पैराग्वे के बारे में कई सवाल किए। बच्चों ने वहां की संस्कृति, जीवनशैली और शिक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी लेने में विशेष रुचि दिखाई।

विद्यार्थियों ने यह भी जानना चाहा कि पैराग्वे में बच्चों की पढ़ाई किस तरह होती है और वहां के स्कूलों में किस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं। विदेशी अतिथियों ने बच्चों के सवालों का सहजता से जवाब दिया और अपने देश से जुड़े अनुभव साझा किए।

इस संवाद से विद्यार्थियों को भारत से अलग एक देश की शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था को समझने का अवसर मिला।

कक्षाओं और शिक्षण पद्धति को करीब से देखा

पैराग्वे से आए मेहमानों ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों के सीखने के तरीके, कक्षा में शिक्षकों की भूमिका और स्कूल में उपलब्ध शैक्षणिक वातावरण को समझने का प्रयास किया।

अतिथियों ने शिक्षकों से विद्यालय की दिनचर्या और शिक्षण पद्धति के बारे में भी बातचीत की। इस दौरान भारतीय विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी का आदान-प्रदान हुआ।

शिक्षा और वैश्विक परिदृश्य पर हुआ विचार-विमर्श

विद्यालय प्रबंधन और विदेशी अतिथियों के बीच एक इंटरैक्शन सेशन भी आयोजित किया गया। इसमें शिक्षा, बदलते वैश्विक परिदृश्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

अतिथियों ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा करते हुए शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए विद्यार्थी अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों को समझने के साथ व्यापक दृष्टिकोण भी विकसित कर सकते हैं।

विद्यार्थियों को वैश्विक सोच विकसित करने का संदेश

विदेशी मेहमानों ने विद्यार्थियों को वैश्विक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के लोगों के बीच संवाद से एक-दूसरे की संस्कृति, विचार और सामाजिक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलता है।

विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव सामान्य कक्षा की पढ़ाई से अलग रहा। विदेशी अतिथियों से सीधे बातचीत के दौरान बच्चों ने न केवल नई जानकारी हासिल की, बल्कि अपनी जिज्ञासा और संवाद क्षमता को भी प्रदर्शित किया।

अंतरराष्ट्रीय संवाद से बच्चों को मिलेगा लाभ

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार इस तरह के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक संवाद विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अलग-अलग देशों से आने वाले लोगों से बातचीत करने से बच्चों को नई संस्कृतियों, शिक्षा पद्धतियों और सामाजिक जीवन के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी मिलती है।

विद्यालय परिवार का मानना है कि स्थानीय परिवेश की समझ के साथ विद्यार्थियों में वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना भी आज के समय की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में जिज्ञासा, संवाद क्षमता और विभिन्न संस्कृतियों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देते हैं।

नंदन गुप्ता के नाम पर संचालित है विद्यालय

अमिला स्थित नंदन बाल विद्या मंदिर का संचालन अमिला के पूर्व चेयरमैन नंदन गुप्ता के नाम पर किया जा रहा है। विद्यालय में पैराग्वे से आए अंतरराष्ट्रीय अतिथियों का भ्रमण स्कूल परिवार के लिए महत्वपूर्ण अवसर रहा।

शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विदेशी मेहमानों के साथ हुए संवाद को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, जिससे विद्यार्थियों को देश-दुनिया को करीब से समझने और नए विचारों से परिचित होने का अवसर मिलता रहे।

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