भारत-चीन सीमा विवाद पर अहम बातचीत से पहले डोभाल की हान झेंग से मुलाकात, शांति पर हुआ मंथन

NSA Ajit Doval ने बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। भारत-चीन सीमा वार्ता से पहले दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर चर्चा की।

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अहम बातचीत से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता मजबूत करने के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

भारतीय दूतावास के मुताबिक, दोनों पक्षों ने आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने पर भी विचार किया।

डोभाल और वांग यी के बीच होगी अहम वार्ता

अजित डोभाल सोमवार को दो दिवसीय चीन दौरे पर बीजिंग पहुंचे थे। वह भारत-चीन सीमा प्रश्न पर Special Representatives (SR) वार्ता में हिस्सा लेने गए हैं। इस तंत्र में डोभाल भारत के विशेष प्रतिनिधि हैं, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी बातचीत का नेतृत्व करते हैं।

दोनों के बीच होने वाली वार्ता में सीमा विवाद के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

Xi Jinping के भारत दौरे से पहले बातचीत क्यों अहम?

डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में भारत-चीन सीमा वार्ता को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात भी हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित बैठक में सीमा विवाद के अलावा व्यापार, द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा का रास्ता तैयार हो सकता है।

2020 के गलवान संघर्ष के बाद रिश्तों में तनाव

भारत और चीन के संबंधों में 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद गंभीर तनाव आया था। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ा।

हालांकि, इसके बाद दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद सीमा विवाद और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मतभेद अभी भी दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

3,488 किलोमीटर लंबी सीमा का विवाद

भारत-चीन सीमा विवाद करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़ा है। वर्ष 2003 में Special Representatives तंत्र की स्थापना की गई थी ताकि दोनों देश सीमा विवाद का व्यापक समाधान खोज सकें।

अब तक इस तंत्र के जरिए अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है, लेकिन दोनों देशों के अधिकारी इसे तनाव और मतभेदों पर बातचीत के लिए महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं।

चीन ने कहा- सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के मुताबिक, इस दौर की बातचीत में दोनों पक्ष सीमा प्रश्न पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। साथ ही दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी साझा समझ की भावना के तहत सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

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