“यूपी BJP प्रभारी विनोद तावड़े 5 सितंबर को पहली बार लखनऊ पहुंचेंगे। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सरकार और संगठन के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति, सांगठनिक बदलाव और कार्यकर्ताओं के होमवर्क पर मंथन करेंगे।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े पांच सितंबर को लखनऊ पहुंचेंगे। प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद यह उनका पहला लखनऊ दौरा होगा।
तावड़े अपने दौरे के दौरान प्रदेश के राजनीतिक और सांगठनिक समीकरणों की समीक्षा करेंगे। पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के साथ संगठन को बूथ स्तर तक और मजबूत करने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
दो पालियों में होगी बैठक, संगठन और चुनाव पर मंथन
भाजपा प्रदेश प्रभारी अपने दौरे में दो पालियों में बैठक करेंगे। इस दौरान सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और आगामी चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा तावड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्रियों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और 2027 के चुनावी समीकरणों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा।
2027 के लिए नए सिरे से चुनावी होमवर्क
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा ने प्रदेश में अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम शुरू किया है। पार्टी संगठन में बदलाव से लेकर क्षेत्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारियां देने तक कई कदम उठाए गए हैं।
विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी उनके संगठनात्मक अनुभव और चुनाव प्रबंधन की क्षमता का लाभ 2027 विधानसभा चुनाव में लेना चाहती है।
विधायकों के प्रदर्शन की भी होगी समीक्षा
पार्टी के भीतर जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता को लेकर भी मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का आकलन किया जा रहा है और चुनाव में नए चेहरों को मौका देने की संभावना पर भी विचार हो सकता है।
हालांकि, 200 से अधिक विधायकों के टिकट काटे जाने की बात फिलहाल पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है। ऐसे में इसे संभावित चुनावी रणनीति और संगठन के भीतर चल रहे मंथन के तौर पर ही देखा जा रहा है।
प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की भूमिका
विनोद तावड़े के प्रयासों के बाद प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिले हैं। प्रदेश इकाई में करीब दो-तिहाई चेहरों को बदला गया है। इसके साथ ही पार्टी के सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में भी बदलाव किया गया है।
इन बदलावों का उद्देश्य संगठन को चुनावी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय करना माना जा रहा है।
अप्रैल में भी लखनऊ में डाला था डेरा
प्रदेश प्रभारी बनने से पहले भी विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखते रहे हैं। इसी वर्ष 12 और 13 अप्रैल को उन्होंने लखनऊ में रहकर सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा की थी।
इस दौरान उन्होंने मंत्रियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी। इसके बाद 10 मई को हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार में कई नए चेहरों को शामिल किया गया। इनमें कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर जैसे नाम शामिल रहे।
निगम, आयोग और बोर्ड में नियुक्तियों पर भी नजर
प्रदेश संगठन के पुनर्गठन के साथ ही निगम, आयोग और विभिन्न बोर्ड में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी तावड़े की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के भीतर अलग-अलग स्तरों पर चेहरों के समायोजन की प्रक्रिया में भी उनका हस्तक्षेप बताया जा रहा है।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर जोर दे रही है, जिनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ और सक्रिय राजनीतिक भूमिका हो।
हरियाणा और बिहार का अनुभव यूपी में आएगा काम
विनोद तावड़े को भाजपा में चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक रणनीति के कुशल नेताओं में गिना जाता है। वर्ष 2020 में उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। इसके बाद 2022 में उन्हें बिहार का प्रभार मिला।
बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में काम करने के दौरान उन्हें अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को करीब से समझने का अवसर मिला। 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में भाजपा के प्रदर्शन और बाद की राजनीतिक परिस्थितियों में भी तावड़े की संगठनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण रही।
यूपी के राजनीतिक मनोविज्ञान को समझने का मिला समय
प्रदेश प्रभारी की औपचारिक जिम्मेदारी मिलने से पहले ही तावड़े उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करते रहे हैं। लखनऊ और वाराणसी समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
इस दौरान उन्होंने संगठन की जमीनी स्थिति, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और अलग-अलग क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों को समझने का प्रयास किया। अब प्रदेश प्रभारी के रूप में उनके सामने इन अनुभवों को 2027 की चुनावी रणनीति में बदलने की चुनौती होगी।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी और जनप्रतिनिधियों की छवि पर भी नजर
भाजपा के सामने 2027 के चुनाव में केवल विपक्ष की चुनौती नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों की जनता के बीच छवि भी महत्वपूर्ण होगी।
पार्टी नेतृत्व यह आकलन कर रहा है कि किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत है और कहां नए सिरे से काम करने की जरूरत है। विधायकों के प्रति स्थानीय स्तर पर नाराजगी और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को भी चुनावी रणनीति में शामिल किया जा सकता है।
2027 के लिए संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी
विनोद तावड़े का पांच सितंबर का लखनऊ दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भाजपा उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने में जुटी है। बैठक में सरकार और संगठन के बीच समन्वय, बूथ स्तर की तैयारियों, कार्यकर्ताओं की भूमिका और संभावित राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
तावड़े की पहली लखनऊ यात्रा से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भाजपा अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में संगठन और जनप्रतिनिधियों से जुड़े और भी अहम फैसले सामने आ सकते हैं।
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