Akhilesh Yadav Swami Avimukteshwaranand Meeting: “लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। “
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में शंकराचार्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य का आशीर्वाद मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है।
आशीर्वाद लेने पहुंचे सपा प्रमुख
जानकारी के अनुसार अखिलेश यादव गुरुवार को दोपहर करीब 12:30 बजे अपने आवास से कृष्णा नगर क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने के लिए रवाना हुए। इस दौरान उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और पूर्व सांसद अन्नू टंडन भी मौजूद मौजूद रही।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दरवाजे पर मौजूद संतों को अखिलेश यादव ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया और उनसे आशीर्वाद लिया।
‘शंकराचार्य का आशीर्वाद सबसे बड़ा’
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि वह शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। उन्होंने कहा,
“कोई भी बड़ा काम करने से पहले अगर शंकराचार्य का आशीर्वाद मिल जाए तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। उनका आशीर्वाद मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है।”

गोरक्षा अभियान को लेकर चर्चा
इस दौरान गोरक्षा के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब गाय की सेवा और संरक्षण के लिए कई फैसले लिए गए थे और भविष्य में भी इसके लिए जो संभव होगा, वह किया जाएगा।
गोरक्षा अभियान का शंखनाद
दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने और पूरे देश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत उन्होंने बुधवार को लखनऊ में एक सभा को संबोधित किया था।

बताया जा रहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 8 मार्च को वाराणसी से यात्रा पर निकले थे और कई जिलों का दौरा करने के बाद 11 मार्च को Lucknow पहुंचे।
पहले भी हो चुका है विवाद
गौरतलब है कि जनवरी में Magh Mela 2026 के दौरान प्रयागराज में प्रशासन और पुलिस के साथ शंकराचार्य का विवाद भी सामने आया था। इसके बाद कई राजनीतिक दलों के नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं।

वहीं, इससे पहले अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लखनऊ कार्यक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाई गई शर्तों पर भी सवाल उठाए थे।
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