दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में हॉस्टल की मांग पर HC ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

Delhi High Court: सत्यानिकेतन PG हादसे के बाद DU कॉलेजों में हॉस्टल की मांग वाली PIL पर तत्काल सुनवाई से HC ने इनकार किया। याचिका बुधवार को ऑटो-लिस्ट होगी।

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से संबद्ध सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि मामले को लेकर अनावश्यक रूप से समय क्यों बर्बाद किया जा रहा है और कहा कि याचिका को बुधवार के लिए ऑटो-लिस्टिंग के तहत दाखिल किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष मंगलवार को मामले की तत्काल लिस्टिंग की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सत्यानिकेतन में PG भवन गिरने की घटना के बाद यह याचिका दाखिल की जा रही है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी।

कोर्ट ने पूछा- अंतरिम आदेश के तौर पर हॉस्टल का निर्देश कैसे दें?

पीठ ने कहा कि सभी कॉलेजों को हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश अंतरिम तौर पर जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि इसी मुद्दे से जुड़ी एक अन्य जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हो चुकी है और उस पर आदेश भी पारित किया जा चुका है।

वकील ने अदालत को बताया कि पहले वाली PIL में मृतकों और घायलों के परिजनों को मुआवजा देने समेत अलग-अलग मांगें की गई थीं। जबकि मौजूदा याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रत्येक कॉलेज को छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इस पर पीठ ने कहा कि ऐसी दिशा-निर्देश अंतरिम रूप से जारी किए जा सकते हैं या नहीं, यह सुनवाई के दौरान देखा जाएगा। अदालत ने याचिका दाखिल करने को कहा और स्पष्ट किया कि इसे बुधवार को लिया जाएगा।

सत्यानिकेतन हादसे के बाद हॉस्टल और PG की सुरक्षा पर सवाल

सत्यानिकेतन में PG भवन गिरने की घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए उपलब्ध आवासीय सुविधाओं और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक हुए इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी।

हादसे के बाद छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल सुविधाओं की मांग तेज हुई है। PIL में इसी आधार पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में हॉस्टल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

MCD की कार्यप्रणाली पर भी हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सत्यानिकेतन भवन हादसे की जांच के लिए उच्चस्तरीय MCD जांच का आदेश दिया था। अदालत ने साफ कहा था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

अदालत ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि ऐसी त्रासदियां दिल्ली नगर निगम (MCD) और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए जाने का परिणाम हो सकती हैं। कोर्ट ने बचाव एवं राहत कार्यों को दोगुना करने का भी निर्देश दिया था, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।

PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि इस घटना ने दिल्ली विश्वविद्यालय और सरकार द्वारा संचालित हॉस्टलों समेत छात्रों के लिए उपलब्ध आवासीय सुविधाओं की कमी, उनकी सुरक्षा और PG सुविधाओं को नियंत्रित करने में MCD व अन्य एजेंसियों की व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता पैदा की है।

इस हादसे के बाद अब विश्वविद्यालय के कॉलेजों में हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को भी अदालत के समक्ष उठाया गया है। इस PIL पर बुधवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।

भवन मालिक और परिवार के खिलाफ कार्रवाई

सत्यानिकेतन हादसे के मामले में भवन मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया था। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं उनके बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच अब हादसे के कारणों, भवन की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी जांच आगे बढ़ रही है।

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