
“अल नीनो के बढ़ते प्रभाव के बीच WHO ने भारत को हाई हेल्थ रिस्क वाले देशों में शामिल किया है। जानें डेंगू-मलेरिया, गर्मी, बाढ़ और स्वास्थ्य पर इसके संभावित असर।“
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट ने भारत को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ा दी है। WHO के आकलन में भारत को अल नीनो के कारण उच्च या बहुत उच्च स्वास्थ्य जोखिम वाले देशों में शामिल किया गया है।
WHO के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव से दक्षिण एशिया में मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। अगस्त से अक्टूबर के दौरान क्षेत्र के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका जताई गई है। ऐसे बदलावों का सीधा असर स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और संक्रामक बीमारियों के जोखिम पर पड़ सकता है।
5 सितंबर को जारी हुई WHO की रिपोर्ट
WHO की Global Public Health Situation Analysis El Niño 2026 रिपोर्ट 5 सितंबर को जारी की गई। इसमें मौसम में संभावित बदलावों के आधार पर अलग-अलग देशों में स्वास्थ्य जोखिम का आकलन किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से में आने वाले महीनों में बारिश और तापमान का सामान्य पैटर्न प्रभावित हो सकता है। भारत के लिए अत्यधिक गर्मी, जल उपलब्धता में बदलाव, खाद्य उत्पादन पर असर और कुछ वेक्टर जनित बीमारियों का जोखिम चिंता का विषय बताया गया है।
दिल्ली में बढ़े डेंगू और मलेरिया के मामले
WHO की चेतावनी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त में दिल्ली में डेंगू के 90 मामले सामने आए, जो इस साल किसी एक महीने में सबसे अधिक बताए गए हैं। 29 अगस्त तक दिल्ली में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 311 हो गई थी।
मलेरिया के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई। दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में मलेरिया के 17 मामले सामने आए थे, जबकि अगस्त में यह संख्या बढ़कर 53 हो गई। इस साल अब तक मलेरिया के कुल 119 मामले दर्ज किए गए।
क्या अल नीनो से सीधे फैलता है डेंगू?
WHO के आकलन में मौजूदा डेंगू या मलेरिया मामलों को सीधे तौर पर अल नीनो का परिणाम नहीं बताया गया है। अल नीनो को ‘रिस्क मॉडिफायर’ के तौर पर देखा गया है। यानी स्थानीय मौसम, मच्छरों के पनपने की परिस्थितियों और स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता के आधार पर इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
मौसम में बदलाव से मच्छरों के प्रजनन और उनके फैलाव की परिस्थितियां बदल सकती हैं। इसलिए पहले से मौजूद वेक्टर जनित बीमारियों वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है।
अत्यधिक गर्मी भी बड़ी चुनौती
भारत के लिए अल नीनो से जुड़ा एक बड़ा खतरा अत्यधिक गर्मी है। ज्यादा तापमान से हीट एग्जॉशन और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा हृदय, सांस, किडनी और मेटाबॉलिज्म से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी अत्यधिक गर्मी का असर पड़ने की आशंका रहती है। WHO ने कुपोषण, खाद्य उपलब्धता में कमी और गैर-संचारी बीमारियों के बिगड़ने जैसे जोखिमों की ओर भी संकेत किया है।
बारिश में बदलाव से खेती और स्वास्थ्य पर असर
अल नीनो के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव होने पर कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। बारिश और पानी की उपलब्धता में बदलाव से अनाज के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बनने पर लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खराब जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था वाले इलाकों में यह जोखिम और ज्यादा हो सकता है।
भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा पर भी नजर
WHO ने भारत की नेपाल और भूटान से लगी सीमाओं को लेकर भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम की ओर ध्यान दिलाया है। मौसम से जुड़ी घटनाओं के कारण यदि लोगों का विस्थापन होता है तो सीमावर्ती क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों के सीमा पार फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे में स्वास्थ्य निगरानी, साफ पानी, स्वच्छता, मच्छर नियंत्रण और समय रहते बीमारी की पहचान जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह के पानी के समय-समय पर असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। इसका प्रभाव केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
भारत जैसे बड़े और जलवायु विविधता वाले देश में इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप में दिखाई दे सकता है। इसलिए WHO की चेतावनी को सीधे तौर पर बीमारी फैलने की भविष्यवाणी के बजाय संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए।
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