“Petrol Diesel Price Cut News: अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड सस्ते हुए हैं, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम घटने की संभावना बढ़ गई है।“
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते की घोषणा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को दोबारा खोलने के एलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट बरकरार रहती है तो आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
ट्रंप के एलान से तेल बाजार में आई तेजी से नरमी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता अंतिम रूप ले चुका है। इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के खोलने तथा अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात कही।
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि अब दुनिया भर के जहाज सामान्य रूप से आवाजाही कर सकेंगे और तेल आपूर्ति बाधित नहीं होगी। इस घोषणा के तुरंत बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज हुई बड़ी गिरावट
समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई।
प्रमुख आंकड़े
- ब्रेंट क्रूड लगभग 3.9 प्रतिशत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
- अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया।
- वैश्विक बाजार में सप्लाई संकट की आशंका कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आती है तो इसका सीधा फायदा ईंधन उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है।
- खाड़ी देशों से एशिया और यूरोप को तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता।
- इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
- फरवरी में संघर्ष बढ़ने के बाद इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
जानकारों का कहना है कि यदि यह मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है तो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG पर क्या होगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा लाभ देश को मिल सकता है।
संभावित फायदे
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना।
- घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें कम हो सकती हैं।
- परिवहन लागत घटने से महंगाई पर दबाव कम होगा।
- उद्योगों की उत्पादन लागत में राहत मिल सकती है।
- विमानन ईंधन की लागत भी कम होने की संभावना।
हालांकि अंतिम फैसला तेल विपणन कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान ने भी की समझौते की पुष्टि
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति बनी है।
शरीफ के अनुसार समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। हालांकि अभी तक समझौते की विस्तृत शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलेगी राहत
ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान समझौता लंबे समय तक कायम रहता है तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी। तेल की स्थिर आपूर्ति से ऊर्जा लागत कम होगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति मिलेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की घोषणा ने वैश्विक तेल बाजार को राहत दी है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले समय में भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। यदि बाजार में यही रुझान जारी रहता है तो आम लोगों को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी।
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